हालांकि, भारी बारिश की वजह से इसके बाद मुकाबला शुरू नहीं हो सका और न ही डकवर्थ लुईस नियम का इस्तेमाल हो सका। मैच को रद्द कर दिया गया और दोनों टीमों को एक-एक अंक मिले। यानी मजबूत स्थिति में पहुंचने और मैच को लगभग अपने नाम कर लेने के बाद भी दक्षिण अफ्रीका की टीम नहीं जीत सकी। उन्हें इस मैच में एक अंक से ही संतोष करना पड़ा। यह एक अंक ग्रुप में आगे चलकर दक्षिण अफ्रीका को नुकसान पहुंचा सकता है। द.अफ्रीका के ग्रुप में जिम्बाब्वे के अलावा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नीदरलैंड की टीमें हैं। ऐसे में एक अंक का भी अंतर निर्णायक साबित हो सकता है।
इससे पहले भी दो बार दक्षिण अफ्रीका के साथ वर्ल्ड कप में ही बारिश की घटनाएं हो चुकी हैं। 1992 वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला सिडनी में इंग्लैंड से था। आखिर में द. अफ्रीका को 13 गेंदों पर 22 रन की जरूरत थी, तभी बारिश की वजह से मैच रुक गया। दस मिनट बाद फिर से मैच शुरू हुआ और डकवर्थ लुईस नियम के तहत दक्षिण अफ्रीका को एक गेंद पर 21 रन चाहिए थे। 13 गेंदों में 22 रन से इक्वेशन एक गेंद में 21 रन तक पहुंच गया था। यह मुकाबला भी दक्षिण अफ्रीका के हाथ से निकल गया था।
इसके बाद 2003 में शॉन पोलक के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने वनडे वर्ल्ड कप में काफी उम्मीदों के साथ हिस्सा लिया था। श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबला खेला जा रहा था। सुपर-सिक्स में पहुंचने के लिए दक्षिण अफ्रीका को जीतना जरूरी था। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 268 रन बनाए थे। मर्वन अटापट्टू ने शतक जड़ा था, जबकि अरविंद डी सिल्वा ने 73 रन बनाए थे। डरबन में खेले गए इस मैच में अंडर लाइट्स 269 रन बनाना बेहद मुश्किल था, लेकिन हर्षल गिब्स और ग्रेम स्मिथ ने शानदार बैटिंग की और 11 ओवर में 65 रन बना लिए थे। इसके बाद स्मिथ आउट हो गए। इसके बाद गैरी कर्स्टन और जैक कैलिस भी कुछ खास नहीं कर सके और 124 पर दक्षिण अफ्रीका के तीन विकेट गिर चुके थे।
धीरे-धीरे स्कोर 149 पर पांच विकेट हो गया। पोलक और मार्क बाउचर ने इसके बाद कमान संभाली और छठे विकेट के लिए 63 रन जोड़ लिए थे। स्कोर 212 पर छह विकेट पहुंच गया था। पोलक फिर रन आउट हो गए। 45 ओवर के बाद दक्षिण अफ्रीका का स्कोर छह विकेट पर 229 रन था। लांस क्लूजनर और बाउचर दक्षिण अफ्रीका को जीत की ओर ले जा रहे थे कि तभी बारिश ने खलल डाला और मैच रोक दिया गया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ियों को लग रहा था कि 45 ओवर में छह विकेट पर 229 रन डकवर्थ लुईस नियम से भी जीत दिलाने के लिए काफी था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब अंपायरों ने नतीजों की घोषणा की तो उन्होंने बताया कि अफ्रीका को जीत के लिए एक और रन बनाना था। यानी 230 रन पर दक्षिण अफ्रीका को विजेता घोषित किया जाता, लेकिन स्कोर इससे कम था और श्रीलंकाई टीम को विजेता बन गई। यह सुनने के बाद कप्तान पोलक समेत पूरा अफ्रीकी ड्रेसिंग रूम चौंक गए थे।
अब एक बार फिर दक्षिण अफ्रीकाई टीम के साथ वर्ल्ड कप में ऐसी घटना हुई है। हालांकि, यह टी20 विश्व कप है। पहले बल्लेबाजी करते हुए चकाबवा आठ रन, कप्तान इरविन दो रन, शॉन विलियम्स एक रन, सिकंदर रजा शून्य बना सके। इसके बाद मधेवेयरे ने 18 गेंदों में 35 रन और मिल्टन शुंबा ने 20 गेंदों में 18 रन की नाबाद पारी खेली। मधेवेयरे ने अपनी पारी में चार चौके और एक छक्का लगाया। इस तरह जिम्बाब्वे की टीम नौ ओवर में 79 रन बना सकी। जवाब में क्विंटन डिकॉक ने लगभग अपनी टीम को जीत दिला ही दी थी। बारिश की वजह से मैच रुकने तक डिकॉक 18 गेंदों में आठ चौके और एक छक्के की मदद से 47 रन और कप्तान तेम्बा बावुमा दो रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। मैच रुकते वक्त दक्षिण अफ्रीका का स्कोर तीन विकेट पर 51 रन था।