भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर सुरेश रैना मुख्य कोच गौतम गंभीर के समर्थन में उतरे हैं। रैना का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजों की नाकामी का दोष कोच को नहीं देना चाहिए। भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज गंवाने की कगार पर खड़ा है। भारत ने कोलकाता और गुवाहाटी टेस्ट में जिस तरह से प्रदर्शन किया है उसके बाद गंभीर की काफी आलोचना हो रही है।
फैंस के निशाने पर आए गंभीर
भारतीय बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद गंभीर फैंस के निशाने पर आए थे। सोशल मीडिया पर गंभीर को कोच पद से हटाने की मांग भी शुरू हो गई थी। वहीं, पूर्व चयनकर्ता कृष्णामचारी श्रीकांत ने भी गंभीर के टीम चयन की आलोचना की थी। उन्होंने नीतीश रेड्डी को प्लेइंग-11 में शामिल करने पर नाराजगी जताई थी। हालांकि, रैना की प्रतिक्रिया इन सबसे अलग है।
रैना बोले- खिलाड़ियों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए
रैना का मानना है कि खिलाड़ियों को नतीजों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। रैना ने कहा, गौती भैया (गौतम गंभीर) ने बहुत मेहनत की है और टेस्ट टीम की मौजूदा स्थिति में उनकी कोई गलती नहीं है। खिलाड़ियों को कड़ी मेहनत करनी होगी और अच्छा खेलना होगा। उनके नेतृत्व में हम सीमित ओवरों के प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां हमने इस साल की शुरुआत में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और दुबई में एशिया कप जीता था।
गंभीर के भविष्य पर क्या बोले रैना?
रैना ने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि घरेलू टेस्ट मैचों में खराब प्रदर्शन के कारण मुख्य कोच के रूप में गंभीर का भविष्य खतरे में है। रैना ने कहा, रन तो खिलाड़ियों को ही बनाने होंगे। कोच मार्गदर्शन और सलाह ही दे सकता है। खिलाड़ियों को अगर कोई समस्या आ रही है, तो उन्हें कोच से इस बारे में बात करना चाहिए। खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो कोच की भी सराहना की जाएगी। लेकिन टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है, तो कोच को उसके पद से बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए। मैं गौतम भैया के साथ खेला हूं, उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम से प्यार है, उन्हें क्रिकेट से प्यार है, मैंने उनके साथ विश्व कप खेला है और जीता भी है। उन्होंने देश के लिए वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है और अच्छा प्रदर्शन करना खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है।
रैना ने कहा, खिलाड़ियों को नियमित रूप से घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए और वहां अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए, अगर वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन में अपने आप दिखाई देगा। इस सीरीज के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकती थी क्योंकि खिलाड़ियों को सफेद गेंद (सीमित ओवर) प्रारूप से लाल गेंद प्रारूप में ढलने का काफी कम समय मिला।