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BCCI को झटका, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं

Wed, 07 Aug 2013 09:48 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सुप्रीम कोर्ट ने करारा झटका दिया है।
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सर्वोच्च अदालत ने स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोपों की जांच करने वाले बोर्ड के दो सदस्यीय दल को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देने के बांबे हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।

हालांकि बोर्ड ने रोक लगाने का आग्रह अप्रत्यक्ष तौर पर किया था। बोर्ड ने जांच दल की रिपोर्ट पर वर्किंग कमेटी को विचार करने की छूट देने की मांग की थी।

जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बीसीसीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार से जवाब तलब किया।
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पीठ ने संगठन से दो सप्ताह के भीतर नोटिस पर जवाब देने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 29 अगस्त को निर्धारित कर दी है।

गौरतलब है कि बीसीसीआई की ओर से गठित दो सदस्यीय जांच दल के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार ने ही याचिका दायर की थी।

पीठ के समक्ष बोर्ड के अधिवक्ता ने कहा कि जांच दल की रिपोर्ट पर वर्किंग कमेटी को विचार करने की अनुमति प्रदान कर दी जाए।

इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा आदेश जारी करना अप्रत्यक्ष तौर पर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाना होगा। हाईकोर्ट ने जांच दल को बोर्ड के नियमों के उल्लंघन के आधार पर गैरकानूनी ठहराया है।

अधिवक्ता ने इस पर कहा कि बीसीसीआई को बोर्ड के ऑपरेशनल नियम की धारा 6 के नियम 2.1 के तहत जांच के लिए दल गठित करने का अधिकार है।

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने नियम 2.2 और 3 के उल्लंघन के आधार पर जांच दल को गैरकानूनी करार दिया है।
हाईकोर्ट में नियम 2.1 के संबंध में कोई दलील नहीं दी गई और नियम 2.2 के तहत हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच दल में आईपीएल को ऑफ बिहैवियर कमेटी के कम से कम एक सदस्य का शामिल होना अनिवार्य है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट पर वर्किंग कमेटी को विचार करने के संबंध में अदालत कोई आदेश नहीं जारी कर रही है।

हाईकोर्ट ने 30 जुलाई को बीसीसीआई और उसके अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को करारा झटका देते हुए कहा कि दो सदस्यीय दल का गठन बोर्ड के बनाए नियमों का उल्लंघन कर किया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच दल का गठन उचित प्रक्रिया और बोर्ड के ऑपरेशनल नियम की धारा 6 के नियम 2.2 और 3 का उल्लंघन कर किया गया। साथ ही हाईकोर्ट ने श्रीनिवासन की उस दलील को भी नकार दिया था कि ऊपरी अदालत में जाने तक इस आदेश पर रोक रखी जाए।

हाईकोर्ट का यह आदेश जांच दल की ओर से 28 जुलाई को पेश की गई उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें श्रीनिवासन, उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी मामले में क्लीन चिट दी गई थी।
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बोर्ड का कहना है कि जांच आयोग का गठन बीसीसीआई और आईपीएल की नियंत्रण काउंसिल की ओर से फिक्सिंग और सट्टेबाजी का खुलासा होने के बाद किया गया।

हाईकोर्ट का कहना है कि ऑपरेशनल नियम 2.2 में यह अनिवार्य है कि जांच आयोग में आईपीएल को ऑफ बिहैवियर कमेटी के कम से कम एक सदस्य का शामिल होना अनिवार्य है।
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