इस सात तारीख का धोनी की जिन्दगी के साथ एक अटूट रिश्ता रहा है और धोनी ने भी खुलकर सात अंक के साथ अपने रिश्ते को पूरी दुनिया के सामने बयां किया है। धोनी कहते हैं कि जब वह पहली बार भारतीय टीम के साथ केन्या गए तो वो अपने लिए जर्सी नंबर ढूंढ रहे थे। उस समय सात नंबर खाली था और वह उन्हें मिल गया।
धोनी का इस अंक के साथ एक रिश्ता जुड़ गया। हालांकि यह भी एक संयोग ही है कि उनका जन्म साल के सातवें महीने के सातवें दिन ही हुआ। सिर्फ उनकी जर्सी का नंबर ही नहीं बल्कि सात नंबर आपको उनके हर बाइक और सभी कार पर अंकित दिखेगा।
यही नहीं वो 'सेवेन' नाम के एक परफ्यूम और डीओ के ब्रांड एम्बैस्डर भी हैं। इसके अलावा माही ने 'फिटसेवन' के नाम से देश-विदेश में जिम की एक चेन खोली है।
धोनी पहले ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के तीन सबसे बड़े इवेंट पर कब्जा जमाया है। 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप को कौन भूल सकता है। पहली बार कप्तानी कर रहे धोनी ने ना सिर्फ अपनी बल्लेबाजी से टीम को शिखर तक पहुंचाया बल्कि कप्तानी का ऐसा नमूना पेश किया की जिसका उदाहरण आज भी बड़े-बड़े मैनेजमेंट स्कूल के कोर्स में पढ़ाया जाता है।
पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए फाइनल में जिस भरोसे के साथ उन्होंने आखिरी ओवर जोगिन्दर शर्मा को पकड़ाया था। उसी कप्तान के भरोसे को जोगिन्दर ने जीत में तब्दील कर दिया और रातों-रात स्टार बन गए।
यह तो सिर्फ धोनी के कप्तानी का पहला ट्रेलर था, इसके बाद तो उन्होंने कई ऐसे अजूबे किये वो लोगों के लिए भूलना आसान नहीं होगा। 2011 वर्ल्ड कप में मिली जीत की पूरी स्क्रिप्ट एम.एस. धोनी ने मानो जैसे खुद ही लिखी हो।
फाइनल का वो मुकाबला शायद ही कोई भूल पायेगा, जब कप्तान ने अपने आपको प्रमोट कर बैटिंग ऑर्डर में युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने मैदान पर उतर गए और टीम को जीत दिलाकर ही पवेलियन वापस लौटे।
धोनी ने अपनी कप्तानी में टीम को 28 साल बाद जीत दिलाई और फाइनल में धोनी का वो छक्का तो शायद ही कोई इस जन्म में भूल पायेगा। इसी छक्के को लेकर सुनील गावस्कर ने कहा था, जब मेरी आखिरी सांसें चल रही होंगी और कोई एक चीज जिसे मैं देखना चाहूंगा वो होगा फाइनल में धोनी का मैच विनिंग छक्का।
यही नहीं आईसीसी की तीसरी ट्रॉफी यानी चैंपियंस ट्रॉफी, जिसे मिनी वर्ल्ड कप भी कहा जाता है। उस पर भी 2013 में उनकी टीम ने जीत हासिल कर एक इतिहास रच दिया। वो आईसीसी की तीनों ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के पहले कप्तान हैं। इस रिकॉर्ड की बराबरी शायद ही कोई कर पायेगा। टेस्ट क्रिकेट में भी धोनी अपनी कप्तानी में टीम को नंबर एक तक पंहुचा दिया था।
धोनी को मिली कप्तानी के पीछे भी एक जबरदस्त कहानी है। शुरुआत में बीसीसीआई टी-20 को इतना तवज्जो नहीं दे रही थी। यहां तक की 2007 में होने वाले पहले टी -20 वर्ल्ड कप में टीम तक भेजने को भी तैयार नहीं थी।
आईसीसी के दबाव के बाद बड़ी मुश्किल से बीसीसीआई टीम भेजने को राजी हुई। राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे बड़े-बड़े नामों ने इस टी-20 वर्ल्ड कप से किनारा कर लिया था। कायदे से इंडिया ने अपनी 'बी' टीम साउथ अफ्रीका भेजी थी और कप्तानी थमा दी थी धोनी के हाथों में।
लेकिन धोनी को इस फॉर्मेट की पूरी समझ थी। ना सिर्फ अपनी बेहतरीन कप्तानी से टीम को ट्रॉफी दिलाई बल्कि अपने बल्ले से भी 120 गेंद खेलकर 154 रनों का योगदान दिया।
एक बेहतरीन खिलाड़ी और टीम प्लेयर
धोनी हमेशा से ही एक टीम प्लेयर रहे हैं और सिर्फ और सिर्फ टीम के लिए ही सोचते है। यही वजह रही की वो कप्तान होने के बावजूद ज्यादातर छह और सात नंबर पर ही बैटिंग करते रहे। इसके बावजूद वनडे में उनकी औसत करीब 51 की है, जबकि टी-20 जैसे फॉर्मेट में भी उन्होंने करीब 36 की औसत से रन बनाए हैं। टेस्ट में भी उनका तकरीबन 38 का औसत है।
धोनी वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं, उन्होंने अब तक कुल 217 छक्के जड़े हैं।
धोनी जिन्होंने करियर की शुरुआत टिकट कलेक्टर से शुरू की थी और बाद में भारत के लिए ट्रॉफी कलेक्टर बन गए। स्वभाव से बहुत विनम्र इंसान है। विनम्र इतने की हाल फिलहाल में आयरलैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 मैच में वो प्लेइंग एलेवेन का हिस्सा नहीं थे। लेकिन इस खिलाड़ी की महानता देखिए। ड्रिंक्स लेकर चले गए बीच मैदान में पानी पिलाने। क्रिकेट की दुनिया में ऐसी घटना आपने कितनी बार देखी होगी।
धोनी जब अपना पद्म-भूषण पुरस्कार लेने पहुंचे तो हर कोई हैरान रह गया क्योंकि धोनी क्रिकेटर की ड्रेस में नहीं बल्कि सेना के अफसर की वर्दी पहनकर वहां पहुंचे थे। लेफ्टिनेंट कर्नल धोनी ने भी वर्दी का पूरा सम्मान रखा और बाकायदा पूरी ड्रिल करते हुए राष्ट्रपति के पास पहुंचे। पहले उन्हें सेल्यूट किया और फिर सम्मान लिया।
धोनी ने बताया की पद्म भूषण पुरस्कार बड़े सम्मान की बात है और इसे सेना की वर्दी में लेना तो इस खुशी और सम्मान को दस गुना बढ़ा देता है।
धोनी लिमिटेड ओवर्स के उस्ताद है और इसमें वो महारत हासिल कर चुके है। उनकी कप्तानी में भारत ने 151 जीत हासिल की हैं. तकनीकी तौर पर वो कोई बहुत बेहतरीन बल्लेबाज नहीं है, लेकिन टीम को जब भी उनकी जरूरत पड़ी, उन्होंने बल्ले का सही इस्तेमाल किया।
उनकी कप्तानी ने मॉडर्न क्रिकेट की पूरी तस्वीर ही बदल दी, जहां लोग कप्तानी का जौहर अपनी आक्रामकता से दिखाते थे। कैप्टन कूल माही ने अपनी विनम्रता और शीतलता से टीम को शिखर तक पंहुचा दिया। उनके इसी अंदाज की पूरी दुनिया कायल है।
शायद ही किसी ने धोनी को किसी दूसरे खिलाड़ी पर गरजते या बरसते देखा होगा। दुनिया के दूसरों देशों के खिलाड़ियों से भी शायद ही उनकी कभी लड़ाई हुई होगी। वो क्रिकेट का जवाब क्रिकेट से देने में यकीन रखते हैं और यही उन्हें महान बनाता है। हम चाहते हैं कि क्रिकेट का ये सितारा हमेशा ही चमकता रहे और टीम को जीत दिलाता रहे।