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...जब मानने के बाद फिर भड़क गए श्रीनिवासन

Sun, 02 Jun 2013 01:55 AM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
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स्पॉट फिक्सिंग विवाद शुरू होने के बाद से ही इस्तीफा नहीं देने की रट लगाए बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन शुक्रवार शाम तक पद छोड़ने को तैयार हो गए थे।
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लेकिन बोर्ड सचिव संजय जगदाले व कोषाध्यक्ष अजय शिर्के के इस्तीफे के बाद दिग्गजों की ओर से उन्हें मनाए जाने पर पानी फिर गया। श्रीनिवासन ने इन दोनों के इस्तीफे के बाद पद छोड़ने से फिर इंकार कर दिया।

सूत्रों की मानें तो इस घटनाक्रम के बाद बोर्ड उपाध्यक्ष अरुण जेटली व संयुक्त सचिव अनुराग ठाकुर को शुक्रवार की देर रात बैठक करनी पड़ी।

अजय शिर्के के इस्तीफा दिए जाने की खबरें सामने आने के बाद बोर्ड के आला अधिकारी सकते में थे। इसके बाद ही शुक्रवार की सुबह से श्रीनिवासन को मनाने का नए सिरे से सिलसिला शुरू हुआ।
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अरुण जेटली व अनुराग ठाकुर ने इसमें पहल की। इन दोनों के ही मनाने पर श्रीनिवासन आठ जून को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाने को तैयार हो गए। बैठक में लंबा समय होने के कारण बगावत के सुर नहीं थमे।

इसके बाद जब उनसे बात की गई तो वह अपना पद छोड़ने को तैयार हो गए। यह खबर बाकी सदस्यों को बताई जानी ही थी कि शिर्के और जगदाले ने इस्तीफा दे दिया। यहीं से कहानी फिर बिगड़ गई।

सूत्र बताते हैं कि श्रीनिवासन ने यहां तक कह दिया कि वह अब किसी कीमत पर नहीं हटेंगे। इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

सूत्र बताते हैं कि जेटली और ठाकुर ने शुक्रवार की रात लंबी मंत्रणा की। इन दोनों की बैठक के बाद श्रीनिवासन को समझाया जा सका। इसके बाद शनिवार की सुबह जेटली ने कहा 24 घंटे के अंदर अच्छी खबर सुनने को मिलेगी।

दरअसल बोर्ड की राजनीति कई गुटों में बंटी है। इनके नेता शरद पवार, श्रीनिवासन, जगमोहन डालमिया और खुद अरुण जेटली हैं। शिर्के और जगदाले पवार के काफी करीबी मानें जाते हैं।

सूत्रों का दावा है कि श्रीनिवासन का कहना है कि इन दोनों के इस्तीफे में पवार गुट ने अपनी भूमिका निभाई है। इसी वजह से वह इन दोनों की वापसी नहीं चाहते हैं।
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डालमिया पवार के धुर विरोधी हैं। इस लिए श्रीनिवासन के साथ रहना उनकी मजबूरी है।

जबकि जेटली का गणित पवार और श्रीनिवासन दोनों के साथ ही फिट बैठता है। ऐसे में श्रीनिवासन को मनाने की कमान भी जेटली गुट ने संभाली जिसमें उन्हें सफलता भी मिली।
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