श्रीलंका में साल 2004 में आई सूनामी ने करीब 13 देशों में भारी तबाही मचाई थी। हिन्द महासागर में तेज हवाओं के साथ ऊंची उठी समुद्री लहरों ने देखते-देखते लाखों लोगों को बेघर कर दिया और कईयों की जिंदगी ले ली। 26 दिसंबर यानी रविवार को इस त्रासदी के 17 वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर श्रीलंका के महान क्रिकेटर और स्टार स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने उस दिन का अपना अनुभव साझा किया है।
श्रीलंका में साल 2004 में आई सूनामी ने करीब 13 देशों में भारी तबाही मचाई थी। हिन्द महासागर में तेज हवाओं के साथ ऊंची उठी समुद्री लहरों ने देखते-देखते लाखों लोगों को बेघर कर दिया और कईयों की जिंदगी ले ली। 26 दिसंबर यानी रविवार को इस त्रासदी के 17 वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर श्रीलंका के महान क्रिकेटर और स्टार स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने उस दिन का अपना अनुभव साझा किया है।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1300 से अधिक विकेट लेने वाले मुरलीधरन ने बताया कि कैसे 17 मिनट की देरी की वजह से उनकी जान बची और किस तरह से उन्होंने पीड़ितों की मदद की।
मुरलीधरन ने डेली मेल से बातचीत में बताया कि उस दिन सुबह आठ बजे वह अपने परिवार के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घर से निकले थे। यह कार्यक्रम उनके मैनेजर कुशील गुनसेकरा के फाउंडेशन ऑफ़ गुडनेस ने असहाय बच्चों को आर्थिक मदद पहुंचाने के इरादे से किया था। वह रास्ते में थे और तभी बीच में गांव वाले शोर करते हुए भागते दिखे। इसपर जब उन्होंने अपनी गाड़ी से उतरकर पूछा तो लोगों ने कहा कि समुद्र का पानी मैदानी इलाकों में आ गया है और उधर (गाले इलाके) जाने में खतरा है।'
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मुरली ने आगे बताया, 'लोगों की बात सुनकर हमने पीछे लौटने का फैसला किया और फिर कोलंबो पहुंच गए। यहां पहुंचकर हमने टीवी ऑन कर देखा तो वहां की हालत देखकर हैरान रह गया। अगर मैं 20 मिनट पहले निकला होता तो हो सकता था कि मैं भी उन लहरों के बीच फंस जाता।'
श्रीलंकाई स्पिनर ने बताया कि कैसे उन्होंने क्रिकेट की मदद से मिलकर देश की मदद की और इसे खड़ा करने में योगदान दिया। उन्होंने कहा, 'मैं विश्व फूड प्रोग्राम का अम्बेसडर था और मैंने इसकी मदद से खाने की सामग्री जुटाई और पीड़ितों और प्रभावितों तक पहुंचाई।'