भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ने के बाद शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने आए। यहां एमसीए स्टेडियम में उन्होंने कहा कि भारत में स्पिलिट कप्तानी यानि तीनों फॉर्मेट में अलग अलग कप्तान नहीं चलते और यह बात उन्हें टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से ही महसूस होने लगी थी।
धोनी ने कहा, ‘मुझे तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तानी पर भरोसा नहीं है। टीम का एक ही कप्तान होना चाहिए। भारत में तीनों फॉर्मेट में अलग अलग कप्तान नहीं काम कर सकते। मैं सही वक्त का इंतजार कर रहा था। मैं चाहता था कि विराट टेस्ट फॉर्मेट की कप्तानी में आसानी से ढल जाएं। विराट हमेशा से तैयार थे और मुझे लगा कि यही सही समय है कि उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाए। इसमें कुछ गलत नहीं है। मौजूदा टीम में तीनों फॉर्मेट में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है।’
धोनी ने पिछले सप्ताह ही सभी को चौंकाते हुए वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया था। इससे पहले दिसंबर 2014 में उन्होंने टेस्ट की कप्तानी छोड़ दी थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे दिमाग में, भारत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई सीरीज (अक्तूबर 2015) कप्तान के तौर पर मेरी अंतिम सीरीज थी। इसके बाद यह साफ था कि मैं जिम्बाब्वे क्यों गया। मैंने अपने इस फैसले के बारे में बीसीसीआई को भी जानकारी दे दी थी कि मैं अब आगे टीम की कप्तानी नहीं संभालूंगा।’