वीवीएस लक्ष्मण को नेशनल क्रिकेट एकेडमी का नया हेड बनाए जाने पर बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि उनका कद सवालों से ऊपर है इसीलिए वो एनसीए के नए हेड हैं। गांगुली के साथ भारतीय टीम के लिए खेलने वाले राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण अब भारतीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच चुके हैं। एनसीए के हेड रहने के बाद द्रविड़ को भारतीय टीम का मुख्य कोच बनाया गया है। उन्होंने रवि शास्त्री की जगह ली है। वहीं द्रविड़ की जगह वीवीएस लक्ष्मण को एनसीए का नया हेड बनाया गया है।
सौरव गांगुली ने बंगाल क्रिकेट का अध्यक्ष रहते हुए वीवीएस लक्ष्मण को अहम जिम्मेदारी दी थी। उनको एनसीए का हेड बनाए जाने के बाद उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा "मैं उन दोनों को हेड कोच और एनसीए का हेड बनाए जाने पर बहुत खुश हूं। क्योंकि ये दोनों ही भारतीय क्रिकेट में बहुत जरूरी पद हैं।"
1996 से 2008 तक साथ खेले थे तीनों
द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण 1996 से 2008 के बीच साथ में खेले थे और इस दौरान भारत की मध्यक्रम बल्लेबाजी काफी मजबूत थी। गांगुली ने कहा कि लक्ष्मण का कद सवालों से ऊपर है। वहीं जब उनसे पूछा गया कि इन दोनों खिलाड़ियों को उनके रोल के लिए राजी करना कितना मुश्किल था तो दादा ने कहा "उन्हें बताया गया कि यह जरूरी है और वो मान गए। हम उन दोनों को इन पदों पर पाकर काफी खुश हैं और भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है। भावुक होने से ज्यादा मैं खुश हूं कि वो दोनों इसके लिए राजी हो गए और वो भारतीय क्रिकेट के लिए यह करना चाहते हैं।"
गांगुली का मानना है कि एनसीए हेड के रूप में लक्ष्मण बड़ा फर्क डालेंगे क्योंकि वो बहुत अच्छे इंसान हैं और भारतीय क्रिकेट में उनका कद बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा "लक्ष्मण के अंदर प्रतिबद्ध रहने की जो क्षमता है, उसकी वजह से हमने उनका चयन किया है। वो हमेशा से ही एक अच्छे इंसान रहे हैं, जिनके साथ काम करने में मजा आता है। भारतीय क्रिकेट में उनका कद किसी भी दूसरी चीज से ऊपर है। राहुल ने एनसीए में एक व्यवस्था बनाई है, जो लक्ष्मण को आगे अच्छा काम करने में मदद करेगी।"
एनसीए हेड बनने पर लक्ष्मण को आर्थिक नुकसान
सौरव ने यह भी बताया कि एनसीए का हेड बनने के लिए लक्ष्मण ने सनराइजर्स हैदराबाद के साथ अपना करार खत्म किया है। इसके अलावा उन्होंने कमेंट्री और कई संस्थाओं के लिए अपना कॉलम लिखने का काम भी छोड़ा है। दादा ने कहा "वो अगले तीन साल के लिए हैदराबाद छोड़कर बैंगलोर में रहेंगे ताकि भारतीय क्रिकेट की सेवा कर सकें। निश्चित रूप से उनकी आय कम होगी, लेकिन वो मान गए हैं। उनकी पत्नी बच्चे भी अब बैंगलोर में रहेंगे। उनके बच्चे अब बैंगलोर के स्कूल में पढ़ेंगे और एक परिवार के रूप में उनके लिए काफी कुछ बदलने वाला है। अगर आप भारतीय क्रिकेट के लिए इतनी श्रद्धा नहीं रखते हैं तो आपके लिए यह आसान नहीं होता है।"