उन्होंने आगे लिखा, 'विशेष आम बैठक में सदस्यों ने एक फैसला किया और आपने जो मुद्दे मेल में लिखे हैं, उन पर गौर करने के लिये एक और विशेष आम बैठक करनी होगी। हमें पिछले हफ्ते आपकी मेल मिली और तब सदस्यों को इस नए मुद्दे के बारे में अपडेट करने के लिये एक अन्य विशेष आम बैठक बुलाने और इस पर फैसला लेने का समय नहीं था।' गांगुली ने आगे लिखा, 'अभी समय की कमी को देखते हुए हम आपके मेल में जिक्र की गई धाराओं पर समय सीमा के अंदर कोई फैसला नहीं दे पायेंगे क्योंकि यह संघ के संविधान के खिलाफ है।'
बता दें कि बीसीसीआई से जुड़ी ज्यादातर राज्य क्रिकेट एसोसिएशन जस्टिस लोढ़ा की इन सिफारिशों में बड़े स्तर पर बदलाव चाहती हैं। यही कारण है कि इन एसोसिएशनों ने इन सिफारिशों को लागू करने के लिए हलफनामा दायर नहीं किया है।
सौरव गांगुली ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट में यह शपथपत्र दायर करेंगे कि हमें इन सिफारिशों को लागू करने में व्यावहारिक मुश्किलें आ रही हैं। हमने इस बारे में पहली एजीएम में ही फैसला ले लिया था। वहीं, 13 राज्यों द्वारा सिफारिशें स्वीकार करने के मेल पर हमें दूसरी एजीएम में फैसला लेना था, लेकिन समय के अभाव के कारण मीटिंग का आयोजन नहीं हो सका।