बता दें कि 25 साल पहले 22 जून 1996 को प्रिंस ऑफ कोलकाता के नाम से मशहूर गांगुली ने टेस्ट करियर का आगाज किया था। अपने टेस्ट डेब्यू का किस्सा साझा करते हुए उन्होंने कहा, 'कई लोगों को लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट खेलने के लिए नहीं मिलता है और मुझे याद है कि लॉर्ड्स का स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था। मैं पहले दिन लंबे कमरे से नीचे उतरकर हैरान था और सौभाग्य से हमने फील्डिंग किया। नहीं तो एक बल्लेबाज के तौर पर मुझे नंबर तीन पर बल्लेबाजी करनी थी। 22 जून का दिन शनिवार था, सभी सीटें भरी हुईं थीं। इसी दिन मैंने शतक जड़ा था। चाय के दौरान मैं 100 पर बल्लेबाजी कर रहा था और मैं मानसिक रूप से थक गया था और शारीरिक रूप से और ज्यादा क्योंकि डेब्यू का पहला शतक था।
उन्होंने आगे कहा, 'भावनाएं, खुशियां, ऊंचाइयां आपको थका देती हैं। मुझे याद है सचिन मेरे पास आए और बोले- तुम आराम करो, चाय पी लो। इसलिए मुझे याद है कि जब मैं ड्रेसिंग रूम में गया था तो हर कोई मेरी उपलब्धि के कारण मुझे खुश करने के लिए ड्रेसिंग रूम के बाहर ताली बजा रहे थे। बीसीसीआई अध्यक्ष ने आगे कहा, 'फिर कुछ वर्षों बाद भारत की कप्तानी करना, एक टीम बनाना, फिर किसी को कप्तानी देना और अभी भी मैच जीतने की यात्रा का हिस्सा बनना और राष्ट्रीय टीम को विकसित होते देखना, दुनिया भर में एक ताकत बनना, जो आपकी कप्तानी में शुरू हुई थी। इसके बाद प्रशासनिक भूमिका में रहकर खेल को बदलने की कोशिश करना और उसे बढ़ावा देना। मैं बहुत भाग्यशाली महसूस करता हूं कि एक अध्यक्ष के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से एक उल्लेखनीय सीरीज जीती। यह एक शानदार यात्रा रही है और एक खिलाड़ी के रूप में, एक क्रिकेटर के रूप में, आप इससे बेहतर कुछ भी उम्मीद नहीं कर सकते।'
बता दें कि अपने डेब्यू मैच में गांगुली ने इंग्लैंड के खिलाफ 131 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी। इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 344 रन बनाए, जिसके जवाब में भारत ने 429 रन बनाए। इंग्लैंड ने दूसरी पारी में नौ विकेट पर 278 रन बनाए। भारत को दूसरी पारी में बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला और मैच ड्रॉ रहा था।