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जब सौरव गांगुली ने बदला अवतार और बन गए सरदार, यह कहानी है बेहद दिलचस्प

Mon, 05 Feb 2018 01:15 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सौरव गांगुली - फोटो : juggernaut
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इसमें कोई शक नहीं कि भारत में क्रिकेटर्स को भगवान की तरह माना जाता है। फैंस के मन में इतना स्नेह होता है कि क्रिकेटर्स के लिए कई बार पब्लिक के बीच जाना मुश्किलभरा काम हो जाता है। अगर कोई क्रिकेटर को पहचान ले तो फैंस उसके प्रति बहुत ज्यादा प्यार दर्शाते हैं, लेकिन इससे कई बार उस क्रिकेटर का काफी उपयुक्त समय बर्बाद भी हो जाता है।
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क्रिकेटर्स भी फिल्म स्टार्स के समान कई बार अनोखे तरीके अपनाने के लिए मजबूर हो जाते हैं ताकि कोई उन्हें नहीं पहचाने। अगर कोई उन्हें नहीं पहचाने तो वह भी एक आम इंसान जैसे पब्लिक प्लेसेस पर अपने समय का आनंद उठा पाते हैं। भेस बदलकर किसी स्थान पर जाने वाले फॉर्मूले को क्रिकेटर्स पिछले कई वर्षों से अपनाते हुए आए हैं।

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी एक मजेदार खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कोलकाता में दुर्गा पूजा में शामिल होने के लिए उन्होंने सरदार का अवतार धारण किया था। गांगुली ने पगड़ी और दाढ़ी लगाई ताकि पब्लिक में कोई उन्हें पहचाने नहीं। गांगुली की पत्नी डोना ने एक मेक-अप आर्टिस्ट बुलाकर सौरव को सरदार लुक दिलाया था।
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गांगुली ने घर वालों से लगाई शर्त, लेकिन नतीजा ऐसा निकला

सौरव गांगुली
गांगुली ने इस मजेदार किस्से का खुलासा अपनी आने वाली किताब 'अ सेंचुरी इज नॉट इनफ' में किया है। पूर्व खिलाड़ी ने कुछ रोचक किस्से पब्लिशर जगरनॉट के पेज पर पोस्ट किए हैं।

गांगुली ने लिखा, 'मैंने हरभजन सिंह जैसे सरदार जी के भेष में जाने का फैसला किया। अगर भीड़ ने मुझे पहचान लिया तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी और इस पर नियंत्रण करना मुश्किल होगा। मगर पैरा लड़कों और परिवार के सदस्यों के साथ ट्रक में दुर्गा मूर्ती ले जाना अनूठा अनुभव होगा, जिसे सोचकर मैं काफी खुश था।'

उन्होंने आगे कहा, 'मेरे सभी रिश्तेदारों ने मुझे घेर लिया और कहा कि आपको पहचान लिया जाएगा। मैंने उन्हें तगड़ा जवाब दिया और चुनौती ले ली कि ऐसा नहीं होगा। मगर उनकी बात सच निकली। मुझे ट्रक में पुलिस वालों ने बैठने की इजाजत नहीं दी और मैं अपनी बेटी सना के साथ कार में बैठकर गया।'
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गांगुली को सबसे पहले इस व्यक्ति ने पहचाना

सौरव गांगुली
बकौल गांगुली, 'जब कार बाबूघाट क्षेत्र पहुंची तो एक पुलिस इंस्पेक्टर ने खिड़की से झांका और मुझे ध्यान से देखा। उसने मुझे पहचान लिया था और इसी कारण वह मुस्कुराया। मैं शर्मिंदा हुआ, लेकिन उनसे कहा कि इसे राज ही रहने दें। वह शानदार अनुभव था। नदी के पास विसर्जन का दृश्य अद्भुत था। इसे समझने के लिए आपको इसे देखना होगा। दुर्गा मां साल में सिर्फ एक बार जो आती हैं।'
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