भारतीय मूल के इंग्लैंड के ऑफ स्पिनर मधूसूदन सिंह पनेसर उर्फ मोंटी पानेसर ने मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में अपनी उंगलियों के कमाल से भारतीय बल्लेबाजों को उन्हीं की मांद में जमीन सूंघने के लिए मजबूर कर दिया। जी हां, सन ऑफ सरदार के आगे टीम इंडिया पस्त हो गई। 30 वर्षीय पानेसर ने मैच में कुल 11 विकेट लेकर इंग्लैंड को दस विकेट से जीत दिलाने के साथ चार मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी भी दिला दी। पनेसर ने पहली पारी में 129 रन पर पांच विकेट और दूसरी पारी में 81 रन पर छह विकेट झटके।
उन्होंने मैच में कुल 210 रन देकर 11 विकेट लिए जो उनके टेस्ट करियर का एक टेस्ट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
भारत के खिलाफ मार्च 2006 में नागपुर में अपना टेस्ट करियर शुरू करने वाले लेफ्ट आर्म स्पिनर पनेसर को अहमदाबाद में पहले टेस्ट में खेलने का मौका नहीं मिला था जिसे भारत ने आसानी से जीत लिया। अहमदाबाद में पनेसर को नहीं उतारे जाने पर इंग्लिश कप्तान एलिस्टेयर कुक और कोच एंडी फ्लावर की काफी आलोचना हुई थी।
दूसरे टेस्ट के लिए पनेसर की टीम में वापसी हुई और इस सिख स्पिनर ने यादगार प्रदर्शन करते हुए सारे समीकरण बदल डाले। पनेसर के लिए यह मैच करियर का सबसे यादगार टेस्ट इसलिए भी बन गया क्योंकि उन्होंने दोनों पारियों में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को पवेलियन का रास्ता दिखाया। पनेसर ने पहली पारी में सचिन को बोल्ड किया और दूसरी पारी में पगबाधा। दोनों ही पारियों में सचिन ने सस्ते में आउट होकर अपने खिलाफ आलोचनाओं का रास्ता खोल दिए।
इंग्लिश लेफ्ट आर्म स्पिनर का यह प्रदर्शन भारत में किसी विदेशी गेंदबाज का एक टेस्ट में दस से ज्यादा विकेट लेने का नौवां और इंग्लिश स्पिनर का दूसरा मौका है। इंग्लैंड के स्पिनर हैडली वेरिटी ने 1934 में भारत के खिलाफ 153 रन देकर 11 विकेट लिए थे। वानखेडे स्टेडियम में एक टेस्ट में दस विकेट लेने का यह पांचवां प्रदर्शन और तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इंग्लैंड के इयान बाथम ने 1980 में 13 विकेट और भारत के एल शिवारामाकृष्णन ने 1984 में 12 विकेट लिए थे।