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Shreyas Iyer: चार साल से खेल रहे क्रिकेट, फुटबॉल-बैडमिंटन में भी चैंपियन; 16 में भटके पर पिता ने सब संभाल लिया

Mon, 20 Nov 2023 04:58 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

श्रेयस अय्यर शुरुआत से ही बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। हालांकि, 16 साल की उम्र में वह राह भटक गए थे, लेकिन उनके पिता ने सब कुछ संभाल लिया और श्रेयस ने दमदार वापसी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया। 
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श्रेयस अय्यर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वनडे विश्व कप 2023 में भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाया है। गेंदबाजी में मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और कुलदीप यादव ने लगातार विकेट लिए हैं। वहीं, बल्ले के साथ विराट कोहली, रोहित शर्मा और लोकेश राहुल ने 500 से ज्यादा रन बनाए हैं। भारत की इस सफलता में श्रेयस अय्यर का योगदान काफी अहम रहा है। उन्होंने चौथे नंबर पर खेलते हुए शानदार बल्लेबाजी की है। श्रेयस टीम की जरूरत के हिसाब से खेलते हैं। वह पहले संभलकर विकेट बचाते हुए बल्लेबाजी करते हैं और बाद में बड़े शॉट खेलते हुए टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचा देते हैं। 
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श्रेयस की पारियां काफी उतार चढ़ाव भरी होती हैं। कभी वह टेस्ट के अंदाज में खेल रहे होते हैं तो अगले ही ओवर में वह टी20 मोड में आ जाते हैं। क्रिकेट में श्रेयस का अब तक का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा है। 

फुटबॉल और बैडमिंटन में भी चैंपियन
श्रेयस अय्यर का जन्म मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं। उनकी मां हाउसमेकर हैं। श्रेयस चार साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलने लगे थे। वह किसी क्लब में नहीं जाते थे, लेकिन दोस्तों के साथ खेलते थे और उनके पिता भी इसकी प्रैक्टिस कराते थे। थोड़े बड़े हुए तो श्रेयस बैडमिंटन और फुटबॉल में भी अच्छा करने लगे। इसके बावजूद जिस चीज में उनका मन लगता था। वह था क्रिकेट में बल्लेबाजी करना।
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इसी वजह से श्रेयस के पिता संतोष अय्यर 11 साल की उम्र में उन्हें शिवाजी पार्क जिमखाना ले गए। यहां प्रवीण आमरे, पद्माकर शिवलकर और संदेश कावले जैसे बेहतरीन कोचों के बीच श्रेयस पले-बढ़े। उन्होंने अंडर-16 क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। इस बीच एक समय ऐसा भी आया, जब श्रेयस के बल्ले से रन निकलने बंद हो गए। वह ट्रायल में फेल होने लगे। इससे वह परेशान हो गए। पढ़ाई-लिखाई में बचपन से ही उनका मन नहीं लगता था। इस वजह से करियर क्रिकेट में ही बनाना था।

पिता ने भटकने से बचाया
श्रेयस के पिता ने कोच से बात की तो पता चला कि बेटा अच्छा खेलता है लेकिन उसका ध्यान थोड़ा भटक गया है। ऐसे में संतोष अय्यर ने बेटे के मानसिक स्वास्थ्य को अहमियत दी और डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर की मदद से श्रेयस ने वापसी की और लगातार अच्छा खेल दिखाया।

साल 2014 में श्रेयस की किस्मत चमकी और भारत की अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में उनका चयन हो गया। उन्होंने मौके का फायदा उठाते हुए लगातार पांच अर्धशतक जड़ दिए। इसके बाद यूनाइटेक किंगडम ट्रेंट ब्रिज क्रिकेट टीम के लिए तीन मैच में 99 के औसत से 297 रन बनाए। 2014-15 विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई के लिए लिस्ट ए क्रिकेट करियर की शुरुआत की और 54.60 की औसत से 273 रन बनाए।

आईपीएल-घरेलू क्रिकेट में किया कमाल
अब श्रेयस का करियर लय पकड़ चुका था। आईपीएल 2015 की नीलामी में दिल्ली की टीम ने उन्हें 2.5 करोड़ में खरीदा और फटाफट क्रिकेट में भी उनका जलवा दिखने लगा। 2014-15 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की। उन्होंने अपने पहले रणजी सीजन में 50.56 की औसत से कुल 809 रन बनाए, जिसमें दो शतक और छह अर्धशतक शामिल थे। रणजी ट्रॉफी के दूसरे सीजन में उन्होंने लगभग 74 के औसत से 1300 से ज्यादा रन बनाकर रिकॉर्ड बना दिया। 

वह आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा खेल दिखाने लगे। इसका इनाम उन्हें मिला और 2017 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 मैच में डेब्यू किया। इसी साल वनडे क्रिकेट में भी उन्हें मौका मिला और वह मध्यक्रम में लगातार अच्छा खेल दिखाते रहे। 2021 में उनके टेस्ट करियर की शुरुआत हुई और पहले मैच में ही उन्होंने शतक जड़ दिया। इस बीच शॉर्ट बॉल के खिलाफ उनकी कमजोरी भी सामने आई, लेकिन इससे पार पाते हुए श्रेयस ने दमदार वापसी की। अब वह टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में से एक हैं और आने वाले समय में देश के कप्तान भी बन सकते हैं।
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