मैच में जापानी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए टूर्नामेंट के इतिहास का दूसरा सबसे कम 41 रन का स्कोर बनाया। इस दौरान उनका कोई भी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया और पांच बल्लेबाज तो अपना खाता भी नहीं खोल पाए। भारत की तरफ से अगर 19 अतिरिक्त रन नहीं दिए गए होते तो जापान अपने नाम सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड भी दर्ज करवा लेता। पूरे मैच में 28 ओवर से भी कम का खेल हुआ और भारतीय टीम ने 4.5 ओवर में ही दस विकेट से मैच जीत लिया।
वैसे अगर एक घटना नहीं हुई होती तो जापान शायद ही अंडर-19 वर्ल्ड कप में भाग ले पाता। दरअसल क्रिकेट के खेल में तेजी से उभरती पापुआ न्यू गिनी की टीम की एक गलती ने ना सिर्फ उनको वर्ल्ड कप में नौंवीं बार भाग लेने से रोक दिया बल्कि जापान को पहली बार खेलने का मौका भी दे दिया।
पिछले साल जून में पापुआ न्यू गिनी और जापान की टीम को रीजनल (क्षेत्रीय) क्वालीफ़ायर का फाइनल मुकाबला खेलना था लेकिन उसी दिन मैच से कुछ घंटे पहले पापुआ के दस खिलाड़ी टोक्यो के उत्तरी क्षेत्र सानो में दुकान से चोरी करते हुए पकड़े गए। इस पूरे वाकये के बाद टीम के खिलाड़ियों को उनके संघ ने बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद टीम के सिर्फ चार खिलाड़ी ही मैच खेलने के लिए योग्य बचे, ऐसे में टीम प्रबंधन को मैच नहीं खेलने का फैसला करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जहां पापुआ न्यू गिनी नौंवीं बार वर्ल्ड कप में भाग लेने से चूक गई वहीं जापान बिना फाइनल मुकाबला खेले ही क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर गई। इस सारे प्रकरण में किसी भी खिलाड़ी के ऊपर किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और खिलाड़ियों को वापस घर भेज दिया गया, साथ ही चोरी के सारे सामान भी वापस दुकानदार को दे दिए गए।