क्रिकेट की दुनिया में बात परिवार की होगी तो पहला नाम पाकिस्तान के मुहम्मद परिवार का आएगा। रईस को छोड़ पांच में से चार भाई वजीर, हनीफ, मुश्ताक और सादिक मोहम्मद टेस्ट क्रिकेट खेले। इस परंपरा को हनीफ के बेटे शोएब मोहम्मद ने आगे बढ़ाया। लेकिन यह विरासत यहीं थमने नहीं जा रही है। क्रिकेट में अपने परिवार की विरासत का ध्वजवाहक बनने शहज़र मोहम्मद आगे आ गए हैं।
शहज़र शोएब के बेटे और हनीफ के पोते हैं। दादा हनीफ को जब लगा कि उनके परिवार की परंपरा आगे बढ़ाने वाला नहीं है तो उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अपने इस पोते को पाकिस्तान बुला लिया। 21 साल के शहज़र न सिर्फ पाकिस्तान लौटे बल्कि वह पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के लिए घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं।
दादा-दादी के साथ भारत-पाकिस्तान सीरीज देखने आए शहज़र ने फिरोजशाह कोटला में अमर उजाला को बताया कि दादा उनके ‘बेस्ट फ्रेंड’ हैं। पिता से उनकी कम बात होती है लेकिन यह दादा ही हैं जो उन्हें पाकिस्तान के लिए खेलते देखना चाहते हैं। पिता ने उन्हें उनकी मां के साथ पढ़ाई के लिए ह्यूस्टन (अमेरिका) भेजा था।
क्रिकेट शहज़र के खून में था तो वहां भी इसे अपनाकर क्लब स्तर पर खेलने लगे। दादा को पता लगा तो उन्होंने कहा पाकिस्तान आओ और यहां आकर खेलो। वह दसवीं में थे लेकिन दादा की इच्छा नहीं तोड़ पाए। लोग पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते हैं लेकिन वह ऐसे शख्स से थे जो दादा और क्रिकेट के लिए पाकिस्तान चले आए। दादा उनके मैच देख उन्हें उनकी खामियां बताते रहते हैं।
शहज़र खुलासा करते हैं कि उनके दूसरे दादा के पोते क्रिकेट नहीं खेलते हैं। उनके दादा को यही खल रहा था। मुश्ताक, सादिक दादा की भी दिली इच्छा है वह पाकिस्तान के लिए खेलें। यहां से जाकर वह सादिक दादा के संरक्षण में कोचिंग शुरू करेंगे। यह विकेट कीपर बल्लेबाज यही कहता है वह अपने परिवार की इच्छा जरूर पूरी करेंगे। ऐसा हुआ तो इतिहास बनेगा। आज तक टेस्ट क्रिकेट में तीन पीढ़ियां एक देश के लिए नहीं खेली हैं।
तीन पीढ़ियां खेलने वाले खिलाड़ी
जार्ज हैडली, रॉन हैडली (वेस्टइंडीज), डीन हैडली (इंग्लैंड)
जहांगीर खान (भारत)माजिद व बाजिद खान (पाकिस्तान)।