क्रिकेट मैच फिक्सिंग (सजेस्टेड स्पॉट फिक्सिंग) के लिए गंभीर कदाचरण केदोषी ठहराए गए क्रिकेटर शलभ श्रीवास्तव को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से राहत नहीं मिली। अदालत ने क्रिकेटर की याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर याची (क्रिकेटर) चाहे तो राहत के लिए सिविल कोर्ट जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह व न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने यह फैसला सोमवार को क्रिकेटर शलभ की रिट पर सुनाया। याची ने बीसीसीआई के उस आदेश को चुनौती देते हुए रद्द किए जाने का आग्रह किया था जिसकेतहत उसे आईसीसी या बीसीसीआई द्वारा आयोजित क्रिकेट मैच खेलने पर 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
याची ने 30 जून 2012 के इस आदेश को प्रभावी न किए जाने व बीसीसीआई द्वारा कराए जाने वाले सभी मैचों में क्रिकेट खेलने की इजाजत दिए जाने का आग्रह किया था। याची का कहना था कि उस पर लगाया यह प्रतिबंध उसके पेशेगत और जीवन के मूल अधिकारों से वंचित किया जाना है।
इस मामले में अनुशासनात्मक समिति ने टेलीफोन पर हुई बातचीत का सार रिकॉर्ड किया था। समिति ने फाइंडिंग में कहा था कि ‘स्ंिटग ऑपरेटर्स’ के साथ विस्तृत बातचीत में याची (क्रिकेटर) ने ‘सजेस्टेड स्पॉट फिक्सिंग के लिए 5 लाख की लगह 10 लाख रुपए की मांग की।
समिति ने माना कि यद्यपि याची के केस में वास्तविक मैच फिक्सिंग का कोई साक्ष्य नहीं था। वह एक अनधिकृत व्यक्ति से बात करने व इसकी जानकारी बीसीसीआई को न देने आदि के गंभीर कदाचरण का दोषी था। कोर्ट ने याची को इस मामले में सिविल कोर्ट जाने की छूट देकर याचिका खारिज कर दी।