भारतीय महिला टीम की 16 वर्षीय सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा पूरे टूर्नामेंट में छाई रहीं। मगर फाइनल में उनका बल्ला नहीं चला। ऑस्ट्रेलिया को हाथों फाइनल में मिली हार के बाद शेफाली के आंसू छलक गए। वह खुद को रोक नहीं पाईं।
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शेफाली वर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
खिताबी मुकाबले में बड़े लक्ष्य के आगे भारत की शुरुआत खराब रही। 16 साली की ओपनर शेफाली वर्मा से बड़ी उम्मीदें थीं, जो इस टूर्नामेंट में अच्छी फॉर्म में रहीं लेकिन फाइनल में वह केवल दो रन पर आउट हो गईं।
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शेफाली वर्मा
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16 साल 40 दिन की उम्र में फाइनल खेलने वाली शेफाली ने पूरे टूर्नामेंट में 32.60 की औसत से 163 रन बनाए। पूरे टूर्नामेंट में उनके बल्ले से सर्वाधिक नौ छक्के और 18 चौके निकले। इसके अलावा उन्होंने पूरे टूर्नामेंट कई रिकॉर्ड्स अपने नाम की।
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शैफाली वर्मा
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शेफाली वर्मा किसी भी फॉर्मेट (टी-20 और वन-डे) में वर्ल्ड कप फाइनल खेलने वाली सबसे युवा (महिला और पुरुष) खिलाड़ी बनीं। इससे पहले यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज की महिला खिलाड़ी शकाना क्विनटाइन के नाम था। उन्होंने 2013 में 17 साल 45 दिन की उम्र में वन-डे वर्ल्ड कप का फाइनल में खेला था।
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शेफाली वर्मा
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शेफाली ने टूर्नामेंट के अपने दूसरे मैच बांग्लादेश के खिलाफ 17 गेंदों में चार छक्के और दो चौके की मदद से 39 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली थी। इस ताबड़तोड़ पारी खेलने के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था। उस समय शेफाली सबसे कम उम्र में मैन ऑफ द मैच का अवार्ड पाने वाली खिलाड़ी बनी थीं। 16 साल और 27 दिन की उम्र में उन्होंने यह कमाल किया था।
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शेफाली वर्मा
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बांग्लादेश के बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ भी अपने तीसरे मुकाबले में शेफाली ने 46 रन की पारी खेलकर मैन ऑफ द मैच का अवार्ड हासिल किया था। लगातार दो मैचों में दो बार मैन ऑफ द मैच हासिल करने वाली वह सबसे युवा खिलाड़ी बनी थी।
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शेफाली वर्मा
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वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन का उन्हें टी-20 रैंकिंग में फायदा मिला। वे इस फॉर्मेट में दुनिया की नंबर एक बल्लेबाज बनीं। सबसे कम 18 मैचों में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। भारत को महिला टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुंचाने में शेफाली का बहुत बड़ा योगदान है।