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Shafali Verma: सालभर का इंतजार, फिर फाइनल में कमाल; शेफाली वर्मा ने दिखाया- क्लास कभी आउट ऑफ फॉर्म नहीं होती

Mon, 03 Nov 2025 12:34 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

भारतीय ओपनर प्रतिका रावल के चोटिल होने के बाद टीम मैनेजमेंट ने अचानक शेफाली को सेमीफाइनल में मौका दिया। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में वह कुछ खास नहीं सकीं, लेकिन उनके शॉट्स में आत्मविश्वास दिखा। हालांकि, फाइनल में शेफाली ने दिखा दिया कि वो अब भी टीम की ‘एक्स फैक्टर’ खिलाड़ी हैं।
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शेफाली वर्मा - फोटो : PTI
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विस्तार
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कभी भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे चमकदार स्टार कही जाने वाली शेफाली वर्मा को एक वक्त ऐसा भी देखना पड़ा जब वे वनडे टीम से बाहर हो गईं। करीब एक साल से ज्यादा वक्त तक वे भारत की वनडे टीम का हिस्सा नहीं थीं। न चयनकर्ताओं की चर्चा में नाम था, न ही वर्ल्ड कप 2025 की संभावित टीम में उनका जिक्र। लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती ही यही है। यहां कहानी पलटने में सिर्फ एक मौका काफी होता है। फाइनल में शेफाली ने 78 गेंद पर सात चौके और दो छक्कों की मदद से 87 रन की दमदार पारी खेली। इतना ही नहीं उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट भी लिए। शेफाली ने अनुभवी मारिजाने कैप और सुने लूस को पवेलियन भेजा। शेफाली को प्लेयर ऑफ द फाइनल चुना गया और वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनीं।
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घरेलू क्रिकेट में जमकर की मेहनत
शेफाली ने जब टीम से बाहर थीं, तब वे घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत कर रही थीं। मैदान पर शॉट्स की चमक भले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं दिख रही थी, लेकिन अभ्यास में उनका जुनून वैसा ही था जैसा डेब्यू के वक्त था। उन्हें पता नहीं था कि अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होती है तो भाग्य का दरवाजा उनके लिए फिर खुल जाएगा। उन्होंने खुद को घरेलू क्रिकेट में झोंक दिया। हरियाणा के लिए उन्होंने 2024-25 सीजन में 75.28 की औसत और 152.31 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। इसी दौरान उन्होंने अपने खेल में बदलाव लाया। अब वो सिर्फ चौके-छक्कों पर निर्भर नहीं थीं, बल्कि स्ट्राइक रोटेट करना और सीधा खेलने की कला सीख चुकी थीं।

मौका आया अप्रत्याशित रूप से
भारतीय ओपनर प्रतिका रावल के चोटिल होने के बाद टीम मैनेजमेंट ने अचानक शेफाली को सेमीफाइनल में मौका दिया। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में वह कुछ खास नहीं सकीं, लेकिन उनके शॉट्स में आत्मविश्वास दिखा। हालांकि, फाइनल में शेफाली ने दिखा दिया कि वो अब भी टीम की ‘एक्स फैक्टर’ खिलाड़ी हैं। फाइनल में भी उन्होंने अपना पुराना जलवा दिखाते हुए दमदार अर्धशतक जड़ा।

'भगवान ने मुझे कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है'
शेफाली जब रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में आईं तो उनका बयान भी प्रेरित करने वाला था। उन्होंने कहा था, 'एक खिलाड़ी होने के नाते प्रतिका के साथ जो हुआ, वह अच्छी बात नहीं थी। कोई नहीं चाहता कि किसी खिलाड़ी को ऐसी चोट लगे।  ईश्वर ने लेकिन मुझे कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है।' उन्होंने कहा, 'मैं घरेलू क्रिकेट खेल रही थी और मैं बहुत अच्छी लय में थी। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मैं मानसिक रूप से खुद को कैसे एकाग्र रखते हुए अपना आत्मविश्वास बढ़ती हूं।' वाकई शेफाली को भगवान ने कुछ अच्छा करने के लिए भेजा था। 

बॉश ने छोड़ा था आसान सा कैच
दिलचस्प बात यह है कि फाइनल के दौरान जब वे 56 रन पर थीं, तब दक्षिण अफ्रीका की फील्डर एनेके बॉश ने उनका आसान सा कैच छोड़ दिया। कई लोग इसे सिर्फ किस्मत कहेंगे, लेकिन शेफाली के लिए यह मेहनत का इनाम था। वो मेहनत जो उन्होंने टीम से बाहर रहते हुए की, खुद को निखारने की, और दोबारा चमकने की।

फाइनल में शेफाली का तूफानी अंदाज
विश्व कप फाइनल में शेफाली ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी की और सबका दिल जीत लिया। यह पारी सिर्फ रन नहीं, बल्कि सहनशीलता और वापसी का प्रतीक बन गई है। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में उनका यह प्रदर्शन टीम के मनोबल को नई ऊंचाई दे गया। शेफाली की यह पारी सिर्फ रन नहीं थी, यह एक संदेश थी कि अगर उन्हें मौका दिया जाए, तो वे किसी भी मैच का रुख बदल सकती हैं। आलोचक कहते थे कि वो कंसिस्टेंट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने जवाब दिया धैर्य, ताकत और क्लास से।

आंकड़े बताते हैं संघर्ष की कहानी
जुलाई 2022 के बाद से शेफाली ने 13 पारियां खेली थीं, जिनमें से नौ में 15 से कम रन और छह में सिंगल डिजिट स्कोर बनाए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद पर काम किया, मानसिक रूप से मजबूत हुईं और जब मौका मिला तो अपने आलोचकों को याद दिला दिया कि वो अब भी वही पुरानी शेफाली हैं, बस अब ज्यादा परिपक्व।
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शेफाली का स्वर्णिम सफर
क्रिकेट में कहा जाता है, 'फॉर्म अस्थायी होती है, लेकिन क्लास स्थायी।' शेफाली वर्मा ने इसे सच कर दिखाया। उनकी यह पारी सिर्फ एक फाइनल नहीं, बल्कि एक कमबैक की कहानी है, उस खिलाड़ी की कहानी, जिसने हार नहीं मानी, और सही वक्त पर अपनी पहचान फिर साबित की। इतनी कम उम्र में घर के मैदान पर विश्व कप से बाहर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से कठिन होता है। लेकिन शेफाली ने उस झटके को प्रेरणा में बदला। यह युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है कि असफलता के बाद भी सपनों से समझौता नहीं करना चाहिए।
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