भारतीय महिला टीम की सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में शानदार पारी खेली और अपनी उपयोगिता साबित की। शेफाली भले ही शतक लगाने से चूक गईं, लेकिन अपनी पारी के दम पर वह बड़ा रिकॉर्ड बनाने में सफल रहीं। शेफाली ने इस दौरान अपने वनडे करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली और 78 गेंद में 87 रन बनाकर आउट हुईं। उन्होंने अपनी पारी में सात चौके और दो छक्के लगाए।
भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराया
भारत ने 50 ओवर के खेल के बाद सात विकेट गंवाकर 298 रन बनाए और दक्षिण अफ्रीका के सामने 299 रन का लक्ष्य रखा। खिताब जीतने के लिए भारत को 298 रन बचाने थे और भारतीय टीम ऐसा करने में सफल रहीं। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा और शेफाली वर्मा ने अर्धशतकीय पारी खेली। एक वक्त ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम 350 के स्कोर तक पहुंच जाएगी, लेकिन मध्यक्रम में विकेट गिरने और धीमी बल्लेबाजी से ऐसा नहीं हो सका और भारतीय टीम 300 के करीब ही पहुंच पाई। हालांकि, उसके लिए विजेता बनने के लिए यही स्कोर काफी हुआ। यह महिला वनडे विश्व कप फाइनल का दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर और भारत का विश्व कप फाइनल का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था।
महिला विश्व कप के फाइनल में 50+ स्कोर बनाने वाली युवा बल्लेबाज
शेफाली ने अपनी पारी के दम पर बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। शेफाली महिला विश्व कप के फाइनल में 50+ स्कोर बनाने वाली सबसे कम उम्र की बल्लेबाज बन गई हैं। शेफाली ने 21 साल 278 दिन की उम्र में फाइनल में 50+ स्कोर बनाया और वह ऐसा करने वाली युवा बल्लेबाज बन गई हैं। शेफाली ने इस मामले में जेस डफिन को पीछे छोड़ा जिन्होंने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 23 साल 235 दिन की उम्र में फाइनल में 50+ स्कोर बनाया था। वहीं, इस सूची में नताली सिवर ब्रंट तीसरे स्थान पर हैं जिन्होंने 2017 में भारत के खिलाफ 24 साल 337 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था।
इतना ही नहीं शेफाली पुरुष या महिला किसी भी वनडे विश्व कप के फाइनल में अर्धशतक लगाने वाले युवा बल्लेबाज बन गई हैं। ये ऐसी उपलब्धि है जिसे अब तक कभी कोई पुरुष क्रिकेटर भी हासिल नहीं कर सका है। भारत के लिए किसी भी खिलाड़ी के लिए इतनी कम उम्र में विश्व कप का फाइनल खेलना अपने आप में ही बड़ी बात है और अब शेफाली ने तो इस बड़े मंच का भरपूर फायदा उठाया।
प्रतिका की जगह टीम में मिला था मौका
शेफाली के लिए वनडे विश्व कप 2025 में खेलना किसी सपने से कम नहीं रहा। दरअसल, उन्हें प्रतिका रावल की जगह टीम में शामिल किया गया था। प्रतिका चोटिल होने के कारण विश्व कप से बाहर हो गई थीं जिसके बाद शेफाली को टीम में लिया गया। प्रतिका और मंधाना की जोड़ी काफी सफल रही थी, ऐसे में सेमीफाइनल से ठीक पहले प्रतिका का इस तरह बाहर होना भारत के लिए झटका माना जा रहा था। हालांकि, फाइनल में उन्होंने जिस तरह से बल्लेबाजी की उससे ये साफ हो गया कि उन्हें शामिल करने का फैसला सही रहा।