थरूर ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, चेतेश्वर के संन्यास पर मुझे बहुत अफसोस हो रहा है। भले ही हाल ही में भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद यह अपरिहार्य था। भले ही उनके पास साबित करने के लिए कुछ भी न बचा हो, फिर भी वे थोड़े और समय तक टीम में बने रहने और भारत के लिए अपने शानदार टेस्ट करियर को देखते हुए एक सम्मानजनक विदाई के हकदार थे। जब उन्हें टीम से बाहर किया गया, तो उन्होंने सहजता के साथ घरेलू मैदान में वापसी की और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लेकिन चयनकर्ताओं ने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया था और उन्हें इस फैसले के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
थरूर ने पुजारा को सराहा
थरूर ने आगे लिखा, मैं उनकी पत्नी की किताब पढ़ी थी और सोच रहा था कि पुजारा ने जो कुछ भी हासिल किया है, उसके लिए कितना कुछ करना पड़ता है। 20 साल पहले, भारत ए के इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने लगातार रन बनाए जिससे पता चला कि वह आगे के लिए तैयार हैं तो उन्होंने पहली बार मेरा ध्यान खींचा था। चयनकर्ता सहमत थे, पुजारा ने अपने पदार्पण मैच की दूसरी पारी में 72 रनों की शानदार पारी खेली और उसके बाद एक-दो असफलताओं के बावजूद तीसरे नंबर पर भारत के भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए। पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी बहुत कमी खली थी।
पुजारा पहले सीनियर खिलाड़ी नहीं हैं जिन्होंने हाल ही में यह फैसला लिया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी क्रिकेट को अलविदा कहा था, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टी20 अंतरराष्ट्रीय के बाद लाल गेंद के प्रारूप को छोड़ने का फैसला किया था।