टीम चयन मामले में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप लगाकर भारतीय क्रिकेट में भूचाल लाने वाले पूर्व चयनकर्ता मोहिंदर अमरनाथ ने इसके लिए बीसीसीआई अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन और आईपीएल की चेन्नई सुपर किंग्स के बॉस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। अमरनाथ ने कहा कि लगातार आठ टेस्ट मैचों में मिली हार के बावजूद श्रीनिवासन के रहमोकरम पर ही धोनी टीम का कप्तान बने हुए हैं।
1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम के हीरो अमरनाथ ने कहा, ‘धोनी को हटाने का फैसला सर्वसम्मति से हुआ था और सभी पांच चयनकर्ता इससे सहमत थे। लेकिन बोर्ड अध्यक्ष श्रीनिवासन ने चयनकर्ताओं के इस फैसले को नहीं माना। जब अगर एक ही आदमी सारे फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है तो फिर चयन समिति की जरूरत ही क्या है। हमें इसमें नहीं होना चाहिए। कौन बीसीसीआई के संविधान को जानता है? क्या मौजूदा समिति को इसकी जानकारी है? मुझे तो कम से कम बीसीसीआई के संविधान की जानकारी नहीं है। हम विश्वास और और ईमानदारी के साथ अपना काम करते हैं। आस्ट्रेलिया में मिली शर्मनाक हार के बाद हमने एक मत से धोनी को हटाने का फैसला कर लिया था।’
देश के लिए 69 टेस्ट और 74 वन-डे खेल चुके अमरनाथ ने कहा कि त्रिकोणीय सीरीज के लिए 17 खिलाड़ियों का चयन किया गया था लेकिन कप्तान के नाम की घोषणा किसी और ने की। अमरनाथ से जब पूछा गया कि श्रीनिवासन द्वारा धोनी को इस तरह सपोर्ट करने के पीछे क्या कारण है तो उन्होंने कहा, ‘जब आप किसी का सम्मान करते तो उससे सवाल नहीं करते। लेकिन, मेरा सवाल यहां यह है कि जब आप एक चयन समिति रखते हो जो कि देश के लिए बेहतर सोचता है, फिर आप उसे टीम चुनने की आजादी क्यों नहीं देते।’
बोर्ड ने खारिज किए आरोप
पूर्व चयनकर्ता मोहिंदर अमरनाथ द्वारा बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन पर लगाए गए आरोप को राजीव शुक्ला ने सिरे से खारिज कर दिया है। बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि चयनकर्ताओं पर कभी किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाता।
शुक्ला ने कहा, ‘मैं इसमें नहीं जाना चाहूंगा कि अमरनाथ ने क्या कहा। मुझे नहीं लगता कि ऐसा कभी हुआ होगा और ना ही इस पर किसी तरह का बयान देना मुझे उचित लग रहा। मैं बस इतना कहूंगा कि चयनकर्ता हमेशा स्वतंत्र रहते हैं और उन पर कभी किसी तरह का दबाव नहीं होता। मेरे हिसाब से इस तरह के बयान सही नहीं हैं और इससे खिलाड़ियों के साथ ही प्रशंसकों में भी कुछ अलग तरह की धारणाएं पैदा होती हैं।’