भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 100वां टेस्ट खेलने जा रहे वीरेंद्र सहवाग की तारीफ करते हुए कहा कि वीरू की मैदान में सकारात्मक सोच उनका सबसे मजबूत पक्ष है।
सहवाग के 99 टेस्टों में से 35 मैचों में उनकी कप्तानी करने वाले धोनी ने कहा कि बैठकर या बातें कर यह बताना बड़ा मुश्किल काम है कि वीरू का साथी खिलाड़ियों पर कितना बड़ा प्रभाव है। जब भी वीरू की बात आती है तो आपको उन्हें समझने के लिए कुछ ज्यादा समय की जरूरत होती है।
पिछले कई महीनों में धोनी और सहवाग के बीच मतभेद की काफी खबरें सामने आई थीं। लेकिन धोनी ने जिस तरह सहवाग की तारीफ की है उससे ऐसा कुछ नजर नहीं आता है। बल्कि सहवाग के खेल से धोनी ही कहीं ज्यादा प्रभावित दिखाई दे रहे हैं। अहमदाबाद में पहले टेस्ट में भारत की जीत में सहवाग के शतक की भी अहम भूमिका रही थी।
भारतीय कप्तान ने कहा कि वीरू के प्रभाव के बारे में कुछ पंक्तियों में चीजें बयां नहीं की जा सकती। जिन लोगों ने उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया है वे इस बात को समझते हैं कि उनकी सोच अलग तरह की है। उनकी सकारात्मक सोच है और वह जुनून के साथ बल्लेबाजी करते हैं। फिर इस बात का कोई मतलब नहीं है कि विकेट टर्न ले रही है या सीम। उनका एक ही मकसद होता है और वह है रन बटोरना।
धोनी ने कहा कि सहवाग का दृष्टिकोण बाकी सबसे अलग है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह फॉर्म में हैं या नहीं। वह हमेशा सकारात्मक सोचते हैं। वह अपनी बल्लेबाजी पर काफी मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनका दृष्टिकोण एक ही है। इसी सोच के कारण आपको खेल में टिके रहने में मदद मिलती है। कप्तान ने कहा कि सहवाग के करियर का सबसे महत्वपूर्ण फैसला उस समय था जब उन्होंने पारी की शुरुआत करने का निर्णय लिया था। यह एक बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया था और आंकडे़ गवाह हैं कि वह कितना सफल रहे हैं।
अपना 100वां टेस्ट खेलने जा रहे सहवाग के लिए धोनी ने कहा कि उनकी पारी की शुरुआत से ही महत्वपूर्ण भूमिका रहती है क्योंकि वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो पहली गेंद से ही अपने शॉट खेल सकते हैं। वह गेंदबाजों पर दबाव बनाते हैं और जब वह ऐसा करते हैं तो गेंदबाजों के लिए वापसी करना बड़ा मुश्किल काम हो जाता है। उन्हें तीनों तरह की क्रिकेट का विशाल अनुभव है। वह गेंद से भी कमाल करते हैं लेकिन इस क्षेत्र में हम उनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं।