महज कुछ समय पहले की बात है जब वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, जहीर खान और हरभजन सिंह के बिना टीम इंडिया की कल्पना ही नहीं की जाती थी।
विज्ञापन
लेकिन गुरुवार को मुंबई में अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया के 30 संभावितों खिलाड़ियों की सूची में भी इन दिग्गजों को जगह नहीं मिली। और अब यह माना जा रहा है कि जब वर्ल्ड कप जैसे अहम टूर्नामेंट में इन दिग्गजों के लिए कोई जगह नहीं है तो अब टीम के लिए दरवाजे लगभग-लगभग बंद हो गए हैं।
चयनकर्ताओं के फैसले से लग रहा है कि वे भविष्य में भी उम्रदराज अनुभवियों के बजाए युवा खून को तरजीह देंगे। हालांकि सहवाग और गंभीर के कोच एएन शर्मा और संजय भारद्वाज को अभी भी उम्मीद है कि ये दोनों ही खिलाड़ी भारतीय टीम में फिर से जगह बना सकते हैं।
विज्ञापन
फॉर्म से जूझते खिलाड़ियों को जगह कैसे मिले?
कभी टीम इंडिया की जीत के ट्रंप कार्ड रहे वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, जहीर खान और हरभजन सिंह का बाहर होना एक तरह से तय माना जा रहा था क्योंकि इनमें से किसी को भी 2014 में एक भी वनडे मैच खेलने का मौका नहीं मिला।
तेज गेंदबाज जहीर तो अगस्त 2012 से ही टीम इंडिया की वनडे टीम से बाहर हैं। फिरकी गेंदबाज हरभजन सिंह जून 2011 से ही टीम में नहीं हैं। साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से किसी ने भी पिछले एक-दो सालों में बेहतरीन प्रदर्शन नहीं किया है, कभी-कभार खेली गई एकाध अच्छी पारियों को छोड़ दिया जाए तो सभी फॉर्म में वापसी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
जिस तरह से उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था उससे लग रहा था कि अब शायद ही टीम में जगह मिले। लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और इस 'महाकुंभ' में खिताब बचाने के लिए कहीं न कहीं दिग्गजों के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन चयनकर्ताओं ने ऐसा करने से मना कर दिया।
पिछले वर्ल्ड कप (2011) के बाद से भारत ने अब तक 95 वनडे खेले हैं, जबकि गौतम गंभीर ने इनमें से 33, युवराज सिंह ने 19, वीरेंद्र सहवाग ने 15, जहीर खान ने 9 और हरभजन सिंह ने सिर्फ 3 वनडे मैच खेले हैं। ऐसे में इनकी वापसी की उम्मीद बेमानी ही थी। और यह तब है जब उभरते क्रिकेट सितारे लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
युवाओं के आगे 'बुजुर्गों' के लिए संभावनाए क्षीण
चयनकर्ताओं की सख्ती का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ल्ड कप में शामिल सिर्फ 4 खिलाड़ी ही इस बार टीम में जगह बचाने में कामयाब रहे हैं।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा उपकप्तान विराट कोहली, सुरेश रैना और आर अश्विन ही 4 लकी खिलाड़ियों में शामिल हैं। कोहली तो टीम इंडिया के अगले रन मशीन हैं।
सहवाग, युवराज और गंभीर ने वनडे में कुल 21,840 रन बनाए हैं लेकिन अब ये तीनों दिग्गज बड़ी पारियां खेलने को तरस रहे हैं। वहीं जहीर खान और हरभजन सिंह ने कुल 541 वनडे विकेट झटके हैं लेकिन उनकी गेंदबाजी में वो धार नहीं रह गई है जो कभी हुआ करती थी।
साथ ही 2011 वर्ल्ड कप के बाद क्रिकेट काफी तेजी से बदला है और अब युवा खिलाड़ियो की पूछ होने लगी है।
वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर दोनों के कोच कहते हैं कि इन दोनों का सपना था 2015 का वर्ल्ड कप खेलना। वह तो पूरा नहीं हुआ लेकिन इनके लिए अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा विराट कोहली, सुरेश रैना और आर अश्विन ही 2011 का वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें 30 संभावितों में जगह मिली है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने पहले ही साफ कर दिया था कि सहवाग के लिए अब टीम में वापसी करना मुश्किल होगा। आखिर उन्होंने पिछले दो साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेली है।
फिर विजय हजारे ट्रॉफी में भी वीरू, हरभजन, युवराज और गंभीर कुछ खास नहीं कर सके जिससे चयनकर्ताओं पर कुछ असर पड़ता। वीरू के कोच एएन शर्मा और गंभीर के कोच संजय भारद्वाज का कहना है कि हालांकि उनकी दोनों से ही बात नहीं हुई है लेकिन उन्हें यह मालूम है कि दोनों वर्ल्ड कप खेलने के लिए आतुर थे। अब उनका वर्ल्ड कप ड्रीम ओवर हो गया है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि दोनों अब देश के लिए कभी नहीं खेल पाएंगे। उन्हें अभी भी लगता है कि घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के बल पर दोनों टीम में वापसी करने में सक्षम हैं।
एक सच्चाई यह भी है कि जिस तरह दोनों दिल्ली के लिए प्रदर्शन दिखा रहे हैं उससे अपने घरेलू टीम में भी स्थान पक्का रखने का दबाव बन पड़ा है।