सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीसीसीआई को एक और झटका दिया है। कोर्ट ने बीसीसीआई की उस याचिका को निरस्त कर दिया है जिसमें उसने लोढ़ा कमेटी की अनुशंसाओं को रिव्यू करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लोढा कमेटी मामले पर सुनवाई करते हुए बीसीसीआई की फटकार लगाई थी और कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करने से संबंधित फैसले को सुरक्षित रख लिया था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने इन सिफारिशों को लागू करने के लिए कुछ और वक्त की मांग की थी। सोमवार को ही बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर कर लोढा कमेटी को अब तक नहीं लागू करने पर अपनी स्थित स्पष्ट की थी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर को हलफनामा देकर यह स्पष्ट करने को कहा था कि उन्होंने आईसीसी को यह कहने के लिए लिखा कि लोढ़ा समिति के सुझाव सरकारी दखल के समकक्ष है। आईसीसी के सीईओ डेव रिचर्डसन ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में ऐसा दावा किया था।
अपने हलफनामे में शशांक मनोहर के संदर्भ में ठाकुर ने कहा कि जब वह बीसीसीआई के अध्यक्ष थे तब उनका मानना था कि यदि बीसीसीआई लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप सीएजी के सदस्य को शीर्ष समिति में सीएजी के सदस्य को शामिल करती है तो यह सरकारी हस्तक्षेप होगा। ऐसा करने पर आईसीसी बीसीसीआई की सदस्यता रद्द कर सकता है। इसलिए उन्होंने उनसे अनुरोध किया था कि वह वर्तमान में आईसीसी अध्यक्ष हैं इसलिए उन्होंने उनसे इस संबंध पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था।