भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज के तीसरे मैच में अर्धशतक लगाने के बाद संजू सैमसन फिर चर्चा में आ गए हैं। सैमसन ने चौथे नंबर पर बल्लेबाजी का मौका मिलने के बाद पहली गेंद से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और 41 गेंद में 51 रन की पारी खेलकर आउट हुए। इस दौरान उन्होंने चार छक्के लगाए। सीरीज के दूसरे मैच में वह कैरबियाई स्पिनर यानिक कारिया का शिकार बने थे और इस मैच में उन्हीं की जमकर कुटाई की। अर्धशतकीय पारी खेलने के बाद सैमसन ने भारतीय टीम में अपनी जगह को लेकर और अपने सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर खुलकर बात की।
टीम इंडिया में अभी भी सैमसन की जगह पक्की नहीं है और वनडे विश्व कप में उनका खेलना काफी मुश्किल है। वह लगातार भारत की वनडे और टी20 टीम से अंदर-बाहर होते रहे हैं, लेकिन कभी भी टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। इस पर सैमसन ने कहा कि पिछले 8-9 साल से वह घरेलू स्तर पर खेलते रहे हैं और भारतीय टीम में जगह पक्की करना आसान नहीं है। वह टीम इंडिया के लिए निरंतरता के साथ प्रदर्शन करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं।
सैमसन ने तीसरे मैच में अर्धशतकीय पारी खेलने के बाद कहा "एक भारतीय क्रिकेटर होना चुनौतीपूर्ण है, मैंने पिछले 8-9 वर्षों से घरेलू क्रिकेट खेला है और भारत के लिए भी अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर खेला हूं, इसलिए यह आपको विभिन्न पदों पर खेलने की थोड़ी समझ देता है। यह आपको मिलने वाले ओवरों की संख्या से जुड़ा है, यह बल्लेबाजी क्रम के बारे में नहीं है इसलिए आपको उसी के अनुसार तैयारी करनी होगी।"
सैमसन दूसरे वनडे के लिए भी भारतीय टीम में थे लेकिन वह तीसरे वनडे जैसी छाप नहीं छोड़ पाए। संजू 19 गेंदों में केवल नौ रन ही बना सके और भारत वह मैच हार गया। वह वास्तव में इस बात से खुश थे कि उन्होंने इस बार क्रीज में अच्छा समय बिताया और 41 गेंदों में 51 रन बनाए।
उन्होंने कहा, "बीच में कुछ समय बिताना, कुछ रन बनाना और अपने देश के लिए योगदान देना वाकई बहुत अच्छा लगता है। मेरे पास अलग-अलग खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग योजनाएं थीं, मैं अपने पैरों का इस्तेमाल करना चाहता था और गेंदबाजों की लेंथ पर हावी होना चाहता था।"
दोनों पिचों (तीसरे और दूसरे वनडे) की तुलना करते हुए सैमसन ने बताया कि क्यों भारतीय बल्लेबाजों ने त्रिनिदाद में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सैमसन ने कहा "वहां (केंसिंग्टन ओवल) की पिच में थोड़ी नमी थी, लेकिन यहां (सतह) थोड़ी सूखा दिखाई देती है। नई गेंदअच्छी तरह से बल्ले पर आ रही थी, लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती गई, वह पिच फंसने लगी और रुककर आने लगी। इस वजह से स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ परेशानी हुई। उस स्कोर (351 रन) को हासिल करना आसान नहीं था, मध्यक्रम के बल्लेबाजों को टिके रहने और उस स्कोर को हासिल करने का श्रेय जाता है।''
वनडे सीरीज 2-1 से जीतने के बाद, भारत अब अपना ध्यान पांच मैचों की टी20 सीरीज पर केंद्रित करेगा। यह सीरीज तीन अगस्त से शुरू होगी।