उनसे पूछा गया कि ड्रेसिंग रूम के उन दो खिलाड़ियों के नाम लीजिए, एक तो वो जो टीम में सबसे अनुशासन में रहता था और दूसरा जो थोड़ा तुनकमिजाजी हो? प्रैंक मास्टर जैसा? इस पर मुरली कार्तिक ने मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा- आपने कहा सबसे अनुशासन में रहने वाला खिलाड़ी तो मैं राहुल द्रविड़ कहूंगा। सब जानते हैं कि जो भी उनके साथ खेलता है वो जानता है कि उनके साथ ज्यादा छेड़खानी नहीं करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि वो हंसी मजाक नहीं करते थे, लेकिन आप खुद सोचिए कि जो आदमी आउट होने के बाद ड्रेसिंग रूम में दो घंटे बैटिंग पैड में बैठा रहे और सोचता रहे कि मैं क्यों आउट हुआ तो समझ सकते हैं कि उनको कितना महसूस होता होगा।
कार्तिक ने कहा- इसके अलावा जिनसे हमें बहुत डर लगता था चाहे वो सचिन हों या अजहरुद्दीन हों या कोई भी, वो थे अनिल कुंबले। जब अनिल कुंबले गेंदबाजी करते थे तो हल्का फुल्का भी इधर उधर हुआ या फिर फील्डिंग में गलती हुई या कोई कैच छूट गया, तो उनकी तरफ कोई भी नहीं देखना चाहता था, चाहे कोई भी हो। हमारी टीम में जो तीन स्पिनर थे, मैं, कुंबले और भज्जी...हम अपने समय के तेज गेंदबाजों से ज्यादा आक्रामक थे। हम विपक्षी बल्लेबाजों को ज्यादा सुनाते थे। तो हम जब खेलते थे तो हम स्पिनर नहीं होते थे, तेज गेंदबाज होते थे।
मुरली कार्तिक ने कहा- प्रैंक मास्टर हरभजन से बेहतर कोई नहीं हो सकता। हमलोग साल 2000 में ऑस्ट्रेलिया सीरीज की तैयारी कर रहे थे। जब लक्ष्मण ने 281 रन बनाए थे। उस सीरीज में मैंने भाग नहीं लिया क्योंकि मेरे कमर में समस्या थी और मैं एक साल के लिए क्रिकेट से दूर हो गया था। प्रैक्टिस सेशन में हम गेंद डाल रहे थे तो और जो हमारे कोच थे जॉन राइट, उन्होंने पिच पर गुड लेंथ पर शॉर्ट लेंथ पर डब्बे बना दिए। तो हम डब्बे में गेंद डाले जा रहे हैं तो राइट ने कहा कि माइकल स्लेटर इन डब्बों वाली जगहों पर खेलते हैं। फिर दो तीन ऐसा ही चला तो एक दिन अचानक से भज्जी के दिमाग में आया कि अगर स्लेटर ने उन डब्बों पर पांव रख दिया तो हम कहां खेलेंगे। भज्जी ने सोचा कि अगर स्लेटर ने डब्बे वाली जगह पर पांव ही रख दिया तो हम गेंद कहां फेकेंगे। सचिन तेंदुलकर ड्रेसिंग रूम बेबी रहे। सबका प्यार उनको मिला।