फिल्म अभिनेता सैफ अली खान के मंसूर अली खान पदौदी का नाम क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार है। वह टीम इंडिया के सबसे युवा कप्तान थे। 1961 में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले पटौदी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की एक हरकत से इतना नाराज हो गए थे कि उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया था।
आइये जानते हैं पूरा मामला...
क्या था पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाब पटौदी ने बीसीसीआई को पैसों के मामले में कोर्ट तक घसीटा था। अप्रैल 2011 में पटौदी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि बीसीसीआई ने उन्हें 1.16 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया था। उन्होंने इस याचिका में बताया था कि उन्हें आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल में कंसलटेंट बनाया गया था।
जानकारी के अनुसार, कंसलटेंट के पद के लिए पटौदी और बीसीसीआई के बीच पांच साल का समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत एक करोड़ रुपये हर साल दिए जाने थे, और समझौते को बीच में खत्म करने के लिए शर्तों को मानना जरूरी था। हालांकि, बीसीसीआई ने ऐसा नहीं किया। नवाब पटौदी ने बताया था कि इस समझौते के तहत उन्हें अगस्त 2008 में 50 लाख रुपये मिले थे।
फैसले से पहले हो गई थी पटौदी की मौत
अक्तूबर 2010 में बीसीसीआई ने उन्हें आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल में जारी रखने के लिए कहा जिसमें पैसे की कोई चर्चा नहीं थी। इसके नतीजतन पुराना समझौता खत्म हो गया, लेकिन बचे हुए पैसे नहीं दिए गए। यही कारण था कि पटौदी ने बीसीसीआई से 1.16 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस मामले पर फैसला आने से पहले ही नवाब पटौदी का देहांत हो गया था।