सार
थरूर ने आगे कहा कि, सचिन के पास उस दौरान एक मजबूत टीम नहीं थी वो अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करना चाहते थे जिस कारण वो कप्तानी में विफल रहे। ऐसे में वह खुद स्वीकार करेंगे कि सबसे प्रेरणादायक, प्रेरक कप्तान नहीं थे। अंत में, उन्होंने खुशी-खुशी कप्तानी छोड़ दी।
प्रख्यात राजनेता और केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर का खेलप्रेम किसी से छिपा नहीं। सोशल मीडिया पर अक्सर छाए रहने वाले थरूर ने मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं। थरूर के मुताबिक 90 के मध्य दशक में सचिन से बेहतर विकल्प टीम के पास था भी नहीं, लेकिन उनकी कप्तानी मुझे कभी प्रभावित नहीं कर पाई। किसी स्पोर्ट्स वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस नेता कहते हैं कि, 'जब वह कप्तान नहीं थे तो बेहद सक्रिय नजर आते थे। स्लिप में खड़े होकर इधर-उधर भागते थे। दौड़कर कप्तान के पास जाते थे। सलाह देते थे, खिलाड़ियों को उत्साहवर्धन बढ़ाते थे, लेकिन सचिन को कप्तानी मिलने के बाद उनके प्रति मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया।
सचिन तेंदुलकर हमेशा से ही क्रिकेटरों के आदर्श रहे हैं, इस खेल का शायद ही ऐसा कोई रिकॉर्ड हो, जो उन्होंने अपने नाम नहीं किया। सचिन ने वह सब कुछ हासिल किया जो एक बल्लेबाज सपना देख सकता है, लेकिन एक कप्तान के रूप में वो सफल नहीं हो पाए। 1996 में टीम इंडिया की बागडोर संभालने वाले तेंदुलकर की अगुवाई में भारतीय दल ने 73 एकदिवसीय में से महज 23 मैच ही जीते। 43 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। उनका जीत प्रतिशत सिर्फ 35.07 है। टेस्ट में तो यह आंकड़ा और खराब हो जाता है। 25 में से सिर्फ चार मैच में जीत मिली। नौ मैच में करारी शिकस्त।