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Rohit Sharma: भारत को विश्व क्रिकेट का पावरहाउस बनते देखना चाहते हैं रोहित, बोले- कप्तानी ने बहुत कुछ सिखाया

Sun, 24 May 2026 02:54 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

भारत और मुंबई इंडियंस के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि वह भारत को विश्व क्रिकेट का पावरहाउस बनते देखना चाहते हैं। रोहित ने मुंबई इंडियंस के 'ईएसए डे' इवेंट में बात करते हुए अपने करियर के शुरुआती दिनों से लेकर कप्तानी तक का अनुभव साझा किया।
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रोहित शर्मा - फोटो : IANS
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विस्तार
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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा का मानना है कि भारतीय क्रिकेट नतीजों और सोच दोनों के मामले में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत विश्व क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ बने। रोहित के अनुसार, कप्तानी ने उनके करियर को नई दिशा देने का काम किया। रोहित ने पिछले कुछ वर्षों में खेल में आए बड़े बदलाव की ओर भी इशारा किया, खासकर छोटे फॉर्मेट में जहां उनके डेब्यू के बाद से बल्लेबाजी अप्रोच और स्कोरिंग पैटर्न में काफी बदलाव आया है।
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रोहित बोले- आज कोई भी स्कोर भरोसेमंद नहीं रहा
मुंबई इंडियंस के 'ईएसए डे' इवेंट में बात करते हुए रोहित ने कहा, मैं चाहता हूं कि भारत विश्व क्रिकेट का पावरहाउस बने। यही मुख्य बात है क्योंकि मैं चाहता हूं कि भारत सर्वश्रेष्ठ बने और क्रिकेट वहां सबसे ऊपर हो। हमने पिछले तीन वर्षों में जो किया है, वह देखने में शानदार रहा है। 2024 विश्व कप से लेकर, महिला विश्व कप, अंडर-19 वर्ल्ड कप, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के अलावा एक और टी20 विश्व कप तक। मुझे उम्मीद है कि हम अपनी जीत का सिलसिला जारी रखेंगे। जब हमने टी20 खेलना शुरू किया था तो 130-140 एक अच्छा स्कोर था, लेकिन अभी यह मुश्किल है। अब कोई भी स्कोर बहुत भरोसेमंद नहीं लगता। यही वह कहानी है जो आपको बताती है कि इतने वर्षों में खेल कैसे आगे बढ़ा है। 

मुंबई इंडियंस के पूर्व कप्तान के अनुसार, आज के क्रिकेटरों की निडरता ने खेल को और ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा, खिलाड़ी ज्यादा निडर हो गए हैं, उन्हें चीजें कैसे करनी चाहिए, इस बारे में खुले विचारों वाले हो गए हैं, जो गेम और लीग के लिए एक अच्छा संकेत है। खिलाड़ी रूढ़िवादी होने के बजाय आगे बढ़ने से नहीं डरते। आने वाले वर्षों में भी यह इसी तरह चलता रहेगा और यह ज्यादा ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

अगली पीढी के क्रिकेटरों पर क्या बोले रोहित?
क्रिकेटर्स की अगली पीढ़ी पर चर्चा करते हुए रोहित ने युवाओं को जीवन में बहुत जल्दी उम्मीदों का बोझ डाले बिना खेल का आनंद उठाने के महत्व पर जोर दिया। वनडे टीम के सलामी बल्लेबाज ने कहा, यह उम्र पर निर्भर करता है। मुझे पता है कि छह साल से लेकर 18 साल तक के बच्चे होते हैं। आप बच्चे पर इतनी जल्दी बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहते। उन्हें बस खेल का आनंद लेना चाहिए, देखना चाहिए और अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहिए। मेरे लिए यह सब ऐसे ही शुरू हुआ। हालात आपको बताएंगे कि इस समय क्या जरूरी है। आप जो खेल खेलना चाहते हैं, उसका मजा लें। कोई आपको कुछ करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

अपने सफर के बारे में बताते हुए रोहित ने माना कि करियर के दौरान उन्हें जो चुनौतियां और मुश्किलें आईं, वे उनके सबसे बड़े सीखने के अनुभवों में से थीं। उन्होंने कहा, मेरे डेब्यू से लेकर अब तक कई ऐसे मौके आए हैं, जहां मुझे सीखने को मिला कि अगर मुझे यहां से ऊपर आना है तो क्या करना होगा। खेल में कोई आसान सफर नहीं होता, ऊपर के साथ-साथ नीचे की ओर भी जाना पड़ता है, जो आपको बहुत कुछ सिखाता है।
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कप्तानी के अनुभव को साझा किया
39 साल के रोहित ने यह भी बताया कि कैसे कप्तानी ने उनके नजरिए को बदला। उन्होंने कहा कि लीडरशीप ने उन्हें अपने प्रदर्शन से आगे सोचने और टीम की मिली-जुली सफलता को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, मैंने भारत और मुंबई इंडियंस की कप्तानी से बहुत कुछ सीखा। कैसे किसी को सब कुछ एक तरफ रखकर यह पक्का करना चाहिए कि टीम का लक्ष्य ज्यादा जरूरी हो। जब कोई कप्तान होता है, तो यह एक अलग कहानी होती है, क्योंकि आपको सिर्फ अपने प्रदर्शन की चिंता करने की जरूरत नहीं होती। आपको दूसरों के प्रदर्शन की भी चिंता करनी होती है। अगर आपने 100 रन बनाए हैं और दूसरे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और टीम मैच हार गई है तो यह चिंता की बात है। जब तक नतीजे नहीं दिखते, तब तक आपको मन की शांति नहीं मिलेगी।
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