भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इस बारे में बात की है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पांचवें और अंतिम टेस्ट में उनके नहीं खेलने के फैसले पर कोच गौतम गंभीर की क्या राय थी। रोहित ने कहा कि वह बस अपने साथ ईमानदारी चाहते थे और जो टीम के लिए सही है वही करना चाहते थे। माइकल क्लार्क के साथ एक पॉडकास्ट में रोहित ने कहा कि जब उन्होंने गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर को बताया कि वह सिडनी टेस्ट में नहीं खेलेंगे तो इन दोनों की प्रतिक्रया इस फैसले को स्वीकार करने और नहीं करने की रही।
खराब दौर से गुजर रहे थे रोहित
रोहित 2024-25 सीजन के दौरान खराब दौर से गुजरे। उन्होंने 15 मैचों में 10.83 के औसत से 164 रन बनाए। रोहित बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान खराब फॉर्म में थे। इसके बाद वह बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले मैच में अपने बेटे के जन्म के कारण नहीं खेले थे। एडिलेड में हुए दूसरे टेस्ट के दौरान जब रोहित वापस आए तो उन्होंने ओपनिंग नहीं की और यशस्वी जायसवाल तथा केएल राहुल को पारी का आगाज करने भेजा। रोहित की अनुपस्थिति में पहले टेस्ट में यशस्वी और राहुल की जोड़ी ने 201 रनों की साझेदारी की थी।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर किया संघर्ष
रोहित छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे, लेकिन संघर्ष करते दिखे। ब्रिसबेन में खेले गए तीसरे टेस्ट में उन्होंने महज 10 रन बनाए। इसके बाद रोहित ने शीर्ष क्रम में वापसी की, लेकिन वहां भी असफल रहे और मेलबर्न टेस्ट में तीन और नौ रन बनाए। शुभमन गिल को चौथे टेस्ट से बाहर रखा गया था और फिर पांचवें टेस्ट के लिए रोहित की जगह गिल की वापसी हुई थी।
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गिल को मौका देना चाहते थे रोहित
रोहित ने पॉडकास्ट के दौरान कहा, सिडनी में आखिरी टेस्ट के दौरान मैं अपने साथ ईमानदारी दिखाना चाहता था। मैं अच्छी तरह गेंद को हिट नहीं कर पा रहा था। मैं खुद को वहां नहीं रखना चाहता था क्योंकि हमारे पास बहुत से अन्य खिलाड़ी भी थे जो संघर्ष कर रहे थे। हम चाहते थे कि गिल खेलें। वह बहुत अच्छा खिलाड़ी है। वह पिछले टेस्ट से बाहर रहे थे। मैंने सोचा था कि ठीक है अगर मैं अच्छी तरह गेंद को हिट नहीं कर पा रहा हूं तो यह सही है। 10 दिन या पांच दिन बाद चीजें बदलेंगी।
उन्होंने कहा, मैंने कोच और चयनकर्ता से बात की जो वहां मौजूद थे। उनकी प्रतिक्रिया इस बारे में कुछ ऐसी थी कि वह इसे स्वीकार भी कर रहे थे और नहीं भी। इस बारे में एक बहस चल रही थी। आपको टीम पहले की नीति पर चलना होता है और उसके अनुसार ही निर्णय लेने होते हैं। कई बार ये काम करता है और कई बार काम नहीं भी करता। हर बार आप जो फैसले लेते हैं, जरूरी नहीं है कि उसकी सफलता की गारंटी मिले।
रोहित ने कहा, जब से मैंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी शुरू की है, सिर्फ मैं ही नहीं, मैं चाहता हूं कि बाकी खिलाड़ी भी ऐसा ही सोचें। टीम को प्राथमिकता दें और टीम के लिए जो जरूरी है वो करें और अपने मन और स्कोर इस तरह की चीजों के बारे में ज्यादा चिंता न करें। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आप एक टीम खेल खेल रहे हैं।