दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत को 51 रन से हार का सामना करना पड़ा। 214 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 19.1 ओवर में 162 रन पर सिमट गई। इस हार के बाद टीम इंडिया की बल्लेबाजी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर बड़े लक्ष्य के पीछा करने के दौरान अपनाए गए अप्रोच को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
उथप्पा ने रणनीति पर उठाए सवाल
पूर्व भारतीय बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने कहा कि समस्या शुरुआती विकेट गिरने की नहीं थी, बल्कि बल्लेबाजों की भूमिका को लेकर स्पष्टता की कमी थी। उनके मुताबिक पारी के शुरुआती ओवरों में जरूरत से ज्यादा लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) रन बनाने को और जटिल बना देता है।
गिल के आउट होने के बाद बदली दिशा
उथप्पा ने खासतौर पर शुभमन गिल के आउट होने के बाद की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब गिल आउट हुए, तब भारत के पास गहरी बल्लेबाजी लाइन-अप मौजूद थी। ऐसे में अक्षर पटेल को एक पिंच-हिटर की भूमिका निभानी चाहिए थी, ताकि तेजी से रन बनाकर दबाव कम किया जा सके और अभिषेक शर्मा को सहयोग मिल सके।
अक्षर पटेल की पारी से नहीं मिला फायदा
उथप्पा के मुताबिक, अक्षर पटेल की संभली हुई 21 रन की पारी (रन-ए-बॉल) दबाव कम करने में नाकाम रही। इससे उल्टा यह हुआ कि विकेट गिरते गए और रन रेट का दबाव और बढ़ता चला गया। नतीजतन भारतीय बल्लेबाजी की रफ्तार और धीमी हो गई, जिससे लक्ष्य और मुश्किल होता चला गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूमिका की स्पष्टता जरूरी
रॉबिन उथप्पा ने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए स्पष्ट भूमिका और स्पष्ट योजना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों को पहले से पता होना चाहिए कि उन्हें किस तरह पारी बनानी है और किस परिस्थिति में कौन-सा जोखिम लेना है।
जरूरत से ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी बनी परेशानी
उथप्पा का मानना है कि शुरुआती छह से आठ ओवरों के बाद मैच-अप के हिसाब से फ्लेक्सिबिलिटी ठीक है, लेकिन उससे पहले मजबूत नींव बनाना जरूरी है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “आप बिना नींव के गगनचुंबी इमारत नहीं बना सकते।” उनके मुताबिक, एक ही मैच में खिलाड़ियों से कई भूमिकाओं की उम्मीद करना रन बनाने को और जटिल बना देता है।
2007 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य की राय
2007 टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे उथप्पा ने कहा कि वह पारी की शुरुआत में ओपनर्स के अलावा बाकी बल्लेबाजों के लिए जरूरत से ज्यादा लचीलापन रखने के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, भारत को बड़े लक्ष्य के पीछा में स्पष्ट रोल्स के साथ उतरने की जरूरत है, तभी ऐसी परिस्थितियों में बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।