भारत के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवें और अंतिम टेस्ट से खुद को बाहर करने के नियमित कप्तान रोहित शर्मा के फैसले को एक भावनात्मक, लेकिन निस्वार्थ कार्य बताया। पंत ने रोहित को एक सच्चा लीडर बताया जिन्होंने खुद को बाहर बैठाकर जसप्रीत बुमराह को टीम की कमान सौंपी। मालूम हो कि भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के अंतिम मैच के लिए प्लेइंग-11 में दो बदलाव किया। रोहित की जगह शुभमन गिल और चोटिल तेज गेंदबाज आकाश दीप की जगह प्रसिद्ध कृष्णा को मौका दिया गया।
पंत ने पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद कहा, 'कुछ ऐसे फैसले होते हैं जिनमें शामिल नहीं रहते। मुझे इससे ज्यादा इस बारे में नहीं बोल सकता। यह एक भावनात्मक फैसला था और हम रोहित को एक लीडर के तौर पर देखते हैं।' रोहित की अनुपस्थिति में कप्तानी संभाल रहे बुमराह ने टॉस के दौरान कहा था कि मैच से बाहर रहने का फैसला पूरी तरह से रोहित का था। उन्होंने कहा, हमारे कप्तान ने खुद को आराम देकर नेतृत्वकर्ता होने का उदाहरण पेश किया है।
अपनी पारी को लेकर क्या बोले पंत?
पंत ने कहा कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवें टेस्ट के पहले दिन उन्होंने संयम के साथ बल्लेबाजी की क्योंकि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) की पिच ऐसी थी कि वह स्वाभाविक आक्रामक खेल दिखा ही नहीं सके। मेलबर्न में पिछले टेस्ट में गैर जिम्मेदाराना शॉट खेलकर विकेट गंवाने के बाद आलोचना झेल रहे पंत ने 98 गेंद में 40 रन बनाए। भारतीय टीम पहली पारी में 185 रन पर आउट हो गई।
पंत ने कहा, इस पारी में विकेट को देखते हुए मैं आक्रामक खेलने की स्थिति में नहीं था। कई बार आपको रक्षात्मक खेलना पड़ता है। कई बार ऐसे मौके थे जब मैं 50-50 जोखिम ले सकता था लेकिन मैंने नहीं लिया। आप स्वाभाविक बल्लेबाजी करना चाहते हैं लेकिन आक्रामकता और रक्षात्मक खेल में संतुलन बनाना भी सीखते हैं। जब आप अच्छा नहीं खेल पाते हैं तो जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं।'