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इंजीनियरिंग कर चुके अश्विन हर मैच के बाद क्या लिखते हैं? कुछ ऐसे सुधारते हैं गलतियां

Sat, 20 Feb 2021 04:04 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रविचंद्रन अश्विन - फोटो : Amar Ujala
टीम इंडिया के अनुभवी स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में अपने प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींचा। चेन्नई के 34 वर्षीय क्रिकेटर ने अपने घरेलू मैदान में इतिहास रचा और गेंदबाजी में पांच विकेट लेने के बाद शतकीय पारी भी खेली। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार वापसी की। उन्होंने यहां गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी छाप छोड़ी। ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं अश्विन से जुड़ी कुछ बेहद खास बातों पर।
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रवि अश्विन - फोटो : ट्विटर @ICC
बुद्धिमान और चतुर खिलाड़ी
अश्विन भारतीय क्रिकेट टीम के बुद्धिमान और चतुर खिलाड़ियों में से एक हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अश्विन विश्लेषण में माहिर हैं और अपनी गलतियों से तुरंत सीखने की कोशिश करते हैं। वे अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए-नए प्रयोग और खोज करते रहते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे हर मैच के आंकड़ों को डायरी में लिखते हैं। अश्विन के बचपन के कोच सुनील सुब्रमण्यम उनके बारे में बताते हैं कि इस स्पिनर को सब कुछ मालूम है। उसे पता रहता है कि बल्लेबाज को कितनी लंबी या छोटी गेंद किस जगह पर डालनी है और उसके लिए कैसी फील्डिंग लगानी है।
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रवि अश्विन - फोटो : पीटीआई
आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने
अश्विन खुद कहते हैं कि वे क्रिकेट के मामले में बचपन से प्रतिभाशाली नहीं रहे, लेकिन खेल में नए-नए तरीके और प्रयोगों ने उनके खेल को बेहतर बनाया। चेन्नई टेस्ट में मैच जिताऊ पारी खेलने के बाद हाल ही में वह आईसीसी के टॉप-5 ऑलराउंडर्स में शामिल हुए। अश्विन को 2016 में आईसीसी ने क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना था। उस वक्त अश्विन के अलावा राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान हासिल था। हालांकि बाद में 2017-18 में विराट कोहली दो बार लगातार आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने। अश्विन फोर्ब्स की इंडिया सेलिब्रिटी सूची में रह चुके हैं। 

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ravichandran ashwin - फोटो : File
अंडर-17 टीम में ओपनर थे अश्विन
अश्विन के पिता भी एक क्रिकेटर थे, वे क्लब क्रिकेट में तेज गेंदबाजी करते थे। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए अश्विन भी क्रिकेटर बन गए। लेकिन वे बचपन से बल्लेबाजी, तेज और स्पिन गेंदबाजी के बीच रोलर-कोस्टर की तरह रहे। जूनियर लेवल क्रिकेट में ओपनर अश्विन का चयन जब इंडिया की अंडर-17 टीम में हुआ तब वे ओपनिंग में असफल रहे। खराब खेल के चलते टीम से बाहर हुए। इसके बाद उन्होंने ऑफ स्पिन गेंदबाजी करनी शुरू की। 
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रविचंद्रन अश्विन
अपनी गेंदबाजी में करते हैं प्रयोग
अश्विन असफलता से प्रभावित नहीं होते हैं और उससे सबक लेते हुए अपनी गलतियों में सुधार करने की कोशिश करते हैं, इसके लिए वे प्रयोग करने से भी नहीं चूकते हैं। 2008 के एशिया कप के दौरान उन्होंने कैरम बॉल करना शुरू कर दी। स्पिन गेंदबाजी के इस तरीके में गेंद अंगूठे और अंगुली के बीच दबाकर फ्लिक की जाती है। अश्विन बताते हैं कि चेन्नई में गली क्रिकेट के दौरान उन्होंने ये गेंदबाजी सीखी थी।
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आर अश्विन - फोटो : ESPN
9 साल की उम्र में ही खेल शुरू कर दिया 
अश्विन ने 9 साल की उम्र में ही स्कूल में खेलना शुरू कर दिया था, वे टीम के स्टार खिलाड़ी रहे। बल्ले के साथ गेंद से भी जौहर दिखाने वाले अश्विन को स्कूल में टीम चयन के दिन गेंदबाजी नहीं करने दी जाती थी। इसके पीछे स्कूल वालों का तर्क होता था कि इससे दूसरे गेंदबाजों के मौके कम होंगे। पद्मा शेषाद्रि बाल भवन के बाद बेडे एंग्लो इंडियन हायर सेकंडरी स्कूल जाने के बाद उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया। यहां कोच सीके विजय कुमार ने ही अश्विन को ऑफ स्पिनर बनने की सलाह दी। 14 साल की उम्र में अश्विन के बाएं पैर के लिगामेंट में दिक्कत हो गई थी, कुछ महीने आराम के बाद वह जल्दी मैदान पर लौट आए थे।
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रविचंद्रन अश्विन - फोटो : social media
पिता खिलाड़ी तो मां हैं खेल की समीक्षक
चेन्नई में जन्मे अश्विन के पिता एन. रविचंद्रन दक्षिण रेलवे में हैं। मां चित्रा निजी कंपनी में काम करती हैं। रविचंद्रन मध्यम गति के गेंदबाज रहे हैं। अश्विन एक साक्षात्कार में बताते हैं कि उनके दादा टेनिस पसंद करते थे। बचपन से अश्विन भी टेनिस खेलना चाहते थे, लेकिन पिता की रुचि और परिस्थितियों के चलते उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। अश्विन कहते हैं कि आज भी हर मैच के बाद उनकी मां उनके खेल के तकनीकी पक्षों पर बात करती हैं और सही-गलत पर अपनी राय देती हैं। 
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रविचंद्रन अश्विन और उनकी पत्नी प्रीति - फोटो : Social Media
वीडियो देखकर और लिखकर गलतियों में करते सुधार
अश्विन को बचपन की दोस्त और उनकी पत्नी प्रीति कहती हैं कि वह अपने गेम से हमेशा जुड़े रहना चाहते हैं। अगर मैदान में उनका दिन खराब बीतता है तो घर आकर कई वीडियो देखकर और लिखकर अपने खेल को बेहतर करने के तरीके खोजने लगते हैं। वे हर मैच के बाद नोट्स बनाते हैं।
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