भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज की शुरुआत हो चुकी है। मोहाली में खेले गए पहले टी20 में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने चार विकेट से जीत हासिल की। ऑस्ट्रेलिया ने 209 रन का लक्ष्य आसानी से 19.2 ओवर में हासिल कर लिया। यह उनका टी20 में भारत के खिलाफ हासिल किया गया सबसे बड़ा लक्ष्य था। पहले वनडे में भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन लचर रहा। अक्षर पटेल को छोड़कर बाकी सभी गेंदबाजों ने 11 से ज्यादा की इकोनॉमी रेट से रन लुटाए।
इससे भी ज्यादा खराब बात यह रही कि भारत के पास कैमरून ग्रीन को एल्बीडब्ल्यू आउट करने का मौका था, लेकिन टीम ने डीआरएस का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बाद ग्रीन ने 30 गेंदों में 61 रन की तूफानी पारी खेली थी। दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई पारी के पांचवें ओवर में युजवेंद्र चहल की गेंद जाकर ग्रीन के बैटिंग पैड पर लगी। इस पर भारतीय खिलाड़ियों ने कोई अपील नहीं की। छठे ओवर में रिप्ले में दिखा कि ग्रीन पूरी तरह एल्बीडब्ल्यू थे। हालांकि, न ही विकेटकीपर दिनेश कार्तिक और न ही कप्तान ने डीआरएस लेने की जहमत उठाई।
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया पहला टी20
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रिप्ले के बाद दोनों एकदूसरे की शक्ल देखते मिले थे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। मैच में कमेंट्री कर रहे पूर्व कोच रवि शास्त्री ने डीआरएस लेने में फेल रहने वाली टीम इंडिया की आलोचना की है। गावस्कर ने कहा- ग्रीन सीधी गेंद पर वह स्वीप करने गए। भारत ने डीआरएस का इस्तेमाल नहीं किया। गेंद स्टंप्स से टकरा रही थी। इस पर शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा- यह हैरान करने वाला है क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों को पता था कि ग्रीन क्रॉस खेलने गए। मैं सोच रहा हूं कि भारतीय खिलाड़ियों ने अपील क्यों नहीं की। क्या ऊंचाई की वजह से या उन्हें लगा गेंद विकेट को हिट नहीं कर रही होगी?
इसके बाद शास्त्री ने एमएस धोनी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- विकेटकीपर की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी जगह महेंद्र सिंह धोनी शानदार थे। दरअसल, डीआरस यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम को धोनी रिव्यू सिस्टम भी कहा जाने लगा था, क्योंकि डीआरएस लेने के धोनी के ज्यादातर फैसले सही साबित होते थे। डीआरएस में धोनी का सक्सेस रेट शानदार था। इसी वजह से शास्त्री ने धोनी की तारीफ की। भारत तीन मैचों की सीरीज से 0-1 से पीछे है। दूसरा टी20 मैच शुक्रवार को नागपुर में खेला जाएगा।