पहली बार एक भी टेस्ट क्रिकेटर के बगैर फाइनल मैच खेलने उतरी मुंबई की टीम ने इतिहास को बदलने के इरादे से मैदान पर उतरी विपक्षी टीम की सारी चुनौतियों को ध्वस्त करते हुए रिकॉर्ड 41वीं बार खिताब पर कब्जा जमा लिया।
ठीक 4 साल बाद रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई के सामने सौराष्ट्र की टीम थी और हर कोई उम्मीद कर रहा था कि बड़े क्रिकेटरों से सजी सौराष्ट्र की टीम मुंबई से पिछली हार का बदला ले लेगी, लेकिन वह इसमें नाकाम रही। पुणे में खेले गए मैच के तीसरे दिन ही मुंबई ने एक पारी और 21 रन से मैच जीत लिया।
रणजी में महाराष्ट्र से अलग मुंबई की टीम एक दूसरी टीम के रूप मे खेलती है और अब तक वह 82 में से रिकॉर्ड 45वीं बार फाइनल में पहुंची थी जिसमें वह 41वीं बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। इन 41 बार में वह 32 बार बंबई टीम के रूप में तो 5 बार मुंबई के नाम से खिताब अपने नाम किया।
दिलचस्प यह है कि इस टीम को जिन 4 फाइनल में हार मिली है उस समय टीम का नाम बंबई था। साथ ही मुंबई ने 1990-91 के बाद से 11 फाइनल खेले हैं और एक मैच भी नहीं हारी।