मुंबई रणजी ट्रॉफी की 39 बार चैंपियन ऐसे ही नहीं बनी है, यह कप्तान अजीत अगरकर और आदित्य तारे ने बृहस्पतिवार को पालम ग्राउंड पर दिखा दिया। अगरकर ने जहां कप्तानी पारी खेलते हुए रणजी ट्रॉफी में दो साल बाद सैकड़ा जड़ा वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज आदित्य तारे ने इस सत्र में अपने ड्रीम रन को जारी रखते हुए जिम्मेदारी से भरा शतक ठोका।
पहले दिन मुंबई को बैकफुट पर ला देने वाले सर्विसेज के गेंदबाज पूरे दिन विकेट के लिए तरसते रहे। खराब रोशनी और बरसात ने मैच के दूसरे दिन भी खलनायक की भूमिका निभाई। दिन भर सिर्फ 65 ओवर डाले जा सके। खेल खत्म होने तक मुंबई ने छह विकेट के नुकसान पर 380 रन बना लिए हैं।
सुबह खराब रोशनी के चलते 45 मिनट देर से खेल शुरू हुआ। लेकिन अगरकर और तारे ने शुरुआती घंटा संभलकर निकाला। इसके बाद दोनों ने गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। दरअसल सुबह चार ओवर डालने के बाद ही सर्विसेज के स्टार गेंदबाज सूरज यादव मैदान से ऐसे वापस लौटे के दिन भर वापस नहीं आए। यही मेजबानों को भारी पड़ा। बुधवार को कठिन दिखाई दे रही पिच पूरी तरह बदली हुई थी। जिसका फायदा मुंबई के दोनों बल्लेबाजों को मिला। टी के बाद दोनों ही बल्लेबाजों ने अपने शतक पूरे किए।
तारे ने जहां 414 मिनट में 16 चौकों की मदद से 297 गेंदों में शतक बनाया तो अगरकर ने 216 गेंदों में 12 चौकों के साथ तीन अंकों को छुआ। दोनों ने शतक पूरा करने के बाद भी कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। जब खेल रोका गया तो उस वक्त अगरकर 113 और तारे 108 रनों पर खेल रहे थे। दोनों बल्लेबाज सातवें विकेट के लिए 211 रन जोड़ चुके हैं। अगरकर ने बाद में स्वीकार भी किया कि पिच पहले दिन जिस तरह व्यवहार कर रही थी, बृहस्पतिवार को उसका मिजाज बदला हुआ था।
लेकिन उन्हें संभलकर खेलने का फायदा मिला। हालांकि सचिन तेंदुलकर का मैच के दूसरे दिन मैदान पर कोई रोल नहीं था। लेकिन टीम के प्रति उनका पूरा समर्पण दिखा। खेल देर से शुरू होने के चलते सचिन पूरी टीम के साथ मैदान पर थे। उन्होंने नेट पर काफी वक्त अपने मध्यम तेज गति के गेंदबाजों जावेद खान, शारदुल ठाकुर और धवल कुलकर्णी के साथ निकाला। उन्होंने इन गेंदबाजों से लंबी बातचीत कर उन्हें गुर भी दिए।