ऐसी परिस्थितियों में सचिन तेंदुलकर आखिरी बार कब खेले होंगे उन्हें भी याद नहीं होगा। धुंध भरी सुबह, गीली आउटफील्ड, चारों ओर से खुला मैदान, सफेद चादर से खड़ी साइड स्क्रीन के पीछे से चमकती बल्लियां, पिच को लेकर उनके दिमाग में उमड़ता लगातार संदेह और ऊपर से मुंबई के तीन विकेट गिरना। इन स्थितियों में सर्विसेज के खिलाफ रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में सजग सचिन की शुरूआत भाग्य के सहारे बल्ले का किनारा लेकर स्लिप से निकले चौके से हुई। पालम ग्राउंड पर इसके बाद उनके बल्ले से ऐसे मैजिक स्ट्रोक निकले कि लगा बड़ी पारी निकलेगी। तभी खब्बू स्पिनर अभिषेक सिन्हा पर एक के बाद दूसरा छक्का लगाने की कोशिश ने उनकी पारी का अंत कर दिया।
गीली आउट फील्ड के चलते सुबह आधा घंटा देर से खेल शुरू हुुआ। मुंबई ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, यही उन्हें भारी पड़ा। यूपी को बिखेरने वाले सूरज यादव और निशान सिंह ने कौस्तुभ पवार, वसीम जाफर, हिकेन शाह को 23 रन के अंदर पवेलियन भेज दिया। लंच तक सचिन 19 पर थे। इसके बाद उन्होंने चार लाजवाब स्ट्रेट और कवर ड्राइव लगाकर दिखाया उनके बल्ले की धार कुंद नहीं पड़ी है।
सूरज को जब उन्होंने लगातार तीन चौके मारे तो स्कोर बोर्ड ने दिखाया उनके पचास हो चुके हैं। लेकिन सचिन ने न बल्ला लहराया और न इधर उधर देखा। उन्हें मालूम था उनका अर्धशतक नहीं हुआ है। स्कोरर ने स्कोर बोर्ड ठीक कराया। 49 पर उन्होंने समय लिया। अर्धशतक पूरा करते ही उन्होंने ड्रेसिंग रूम और अपनी कारें, मोटर साइकिल रोक सड़क किनारे रेलिंग पर लटके उन्हें देख रहे सैकड़ों लोगों का बल्ला उठाकर आवाहन स्वीकारा।
चयनकर्ता रोजर बिन्नी और राजिंदर सिंह हंस भी उनकी पारी का मजा ले रहे थे। यूपी के खिलाफ एक भी गेंद नहीं डालने वाले स्पिनर अभिषेक के आक्रमण पर आते ही उन्होंने मिड ऑन पर छक्का मारा लेकिन यह उनके बल्ले के गोल्डन स्पॉट से नहीं निकला था। अगली गेंद पर उन्होंने यही स्ट्रोक दोहराया और मिड ऑन पर लपके गए। सचिन ने 75 गेंदों में एक छक्के व 10 चौकों की मदद से 56 रन बनाए। उन्होंने अभिषेक नायर के साथ 81 रन जोड़े। नायर ने 160 गेंदों में 70 रन बनाए। खराब रोशनी केचलते खेल रोक दिया गया। मुंबई ने छह विकेट पर 198 रन बना लिए हैं। सूरज यादव व शादाब नजर ने दो-दो विकेट लिए।