हर्ष दुबे की शानदार गेंदबाजी की मदद से रणजी चैंपियन विदर्भ ने शेष भारत को 93 रनों से हराकर ईरान कप का खिताब तीसरी बार अपने नाम कर लिया। विदर्भ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 342 रन बनाए और शेष भारत की पहली पारी 214 रन पर ऑलआउट कर दी। इस तरह विदर्भ ने पहली पारी में 128 रनों की बढ़त हासिल की। विदर्भ ने फिर दूसरी पारी में 232 रन बनाए और शेष भारत को 361 रनों का लक्ष्य दिया। हालांकि, शेष भारत की टीम दूसरी पारी में 267 रन पर ऑलआउट हो गई और उसे हार का सामना करना पड़ा।
ढुल की मेहनत पर फिरा पानी
विदर्भ के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए शेष भारत की बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही और उसने पांच विकेट 80 रन पर ही गंवा दिए। इसके बाद यश ढुल ने मोर्चा संभाला और टीम को लक्ष्य के करीब तक पहुंचाने का प्रयास किया। ढुल ने अर्धशतक लगाया और वह शतक की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन यश ठाकुर ने उन्हें आउट कर शतक लगाने से रोक दिया। ढुल 117 गेंदों पर आठ चौकों और एक छक्के की मदद से 92 रन बनाए। फिर मानव सुथार अंत तक टिके रहे, लेकिन दूसरे छोर पर उन्हें अच्छा साथ नहीं मिल सका। सुथार 113 गेंदों पर चार चौकों और एक छक्के की मदद से 56 रन बनाकर नाबाद रहे। विदर्भ के लिए हर्ष दुबे ने चार विकेट लिए, जबकि आदित्य ठकारे और यश ठाकुर को दो-दो विकेट मिले। पार्थ रेखाड़े और दर्शन नालकंडे को एक-एक विकेट मिले।
शेष भारत ने मैच के आखिरी दिन दो विकेट पर 30 रन से आगे खेलते हुए 133 रन तक छह विकेट गंवा दिए। ढुल ने इसके बाद मानव सुथार के साथ 104 रन की साझेदारी कर टीम की उम्मीदें जगा दी। ठाकुर ने हालांकि ढुल को पवेलियन की राह दिखाकर मैच में विदर्भ का पूरी तरह से दबदबा कायम कर दिया। ढुल के आक्रामक शॉट पर डीप थर्ड मैन की दिशा में अथर्व तायडे ने शानदार कैच लपका। ठाकुर ने इसके बाद ढुल को बाहर जाने का इशारा किया जिससे दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान में तनातनी देखने को मिली। दोनों अंपायर और विदर्भ के क्षेत्ररक्षकों ने बीच में आकर स्थिति को शांत करने की कोशिश की। मैच रैफरी दोनों पर किसी तरह का जुर्माना लगा सकते हें। ठाकुर ने अगली ही गेंद पर आकाश दीप को बोल्ड किया और फिर पिछले साल रणजी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दुबे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच खत्म किया।