सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) की सिफारिश पर निर्वाचन अधिकारी एन गोपालस्वामी ने यूपी क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिनिधि राजीव शुक्ला को बीसीसीआई चुनाव से बाहर कर दिया है। यही नहीं गोपालस्वामी की ओर जारी की गई आधिकारिक प्रतिनिधियों की सूची में केवल 30 पूर्व सदस्यों को जगह दी गई है।
यूपी के अलावा हरियाणा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मणिपुर और तीन सरकारी संस्थान रेलवे, सेना, यूनिवर्सिटी को भी चुनाव से बाहर कर दिया गया है। शुक्ला पर यह कार्रवाई उनके खिलाफ आई शिकायतों के आधार पर की गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद तमिलनाडु की ओर से एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली गई है। छुट्टियों के बाद सोमवार को यह मामला फिर अदालत पहुंच सकता है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि निर्वाचन अधिकारी के फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
शुक्ला के खिलाफ मध्य प्रदेश के संजीव गुप्ता और अलीगढ़ के प्रदीप सिंह ने सीओए को शिकायत की थी। उनकी रिहायश यूपी के बाहर दिल्ली की बताई गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि उनका कूलिंग ऑफ पीरियड अभी समाप्त नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने उनके कार्यकाल में वर्किंग कमेटी के समय को भी जोड़ लिया। इसी आधार पर राजीव शुक्ला को बीसीसीआई चुनाव से बाहर करने का फैसला लिया गया है।
वहीं रेलवे, सेना और यूनिवर्सिटी (एआईयू) को बीसीसीआई चुनाव में वोटिंग अधिकार नहीं दिया गया है। इन तीनों सरकारी संस्थानों के बारे में कहा गया है कि इन्होंने अपने यहां प्लेयर्स एसोसिएशन का गठन नहीं किया गया है। कुछ ही दिनों में निर्वाचन अधिकारी की ओर से चुनाव में भाग लेने वालों की आधिकारिक सूची जारी कर दी जाएगी, लेकिन उसमें ये आठ राज्य और संस्थान नहीं होंगे।
निर्वाचन अधिकारी की इस कार्रवाई के बाद बीसीसीआई चुनाव एक बार फिर विवादों में आ गया है। अगर यह मामला अदालत में जाता है तो चुनाव के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं