करियर की शुरुआत में ध्रुव ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे, लेकिन उनकी गेंदबाजी कुछ खास नहीं थी। ऐसे में उन्होंने विकेटकीपिंग में हाथ आजमाया और इस रोल में उन्होंने सभी को प्रभावित किया। इसके साथ ही वह मध्यक्रम बल्लेबाज होने के साथ ही विकेटकीपर भी बन गए। ध्रुव 12 साल के हुए तो उन्होंने घर में क्रिकेट किट की मांग की। आर्मी से रिटायर पिता के लिए बिना कुछ सोचे-समझे क्रिकेट किट खरीदना आम नहीं था। साथ ही वह चाहते थे कि बेटा सेना में अफसर बने। इस वजह से वह किट नहीं खरीद रहे थे। ऐसे में ध्रुव ने कहा कि अगर उन्हें क्रिकेट किट नहीं मिली तो वह घर छोड़ देंगे। ऐसे में उनकी मां ने सोने की चेन बेचकर बेटे को किट दिलाई।
क्रिकेट में ध्रुव की रुचि और प्रतिभा देखकर पिता भी उनका समर्थन करने लगे। इसके बाद ध्रुव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 2020 में देश की अंडर-19 टीम में चुने गए और उपकप्तान भी बनाए गए। उनकी टीम विश्व कप के फाइनल में बांग्लादेश से हार गई, लेकिन ध्रुव ने अपनी कप्तानी में अंडर-19 एशिया कप जीता।
वह महेंद्र सिंह धोनी की तरह कप्तानी करना चाहते हैं। विकेट के पीछे धैर्य और चतुराई के साथ विपक्षी बल्लेबाजों को फंसाते हुए उन्होंने अंडर-19 एशिया कप में बहुत ही छोटे लक्ष्य का बचाव करते हुए पांच रन से जीत हासिल की थी। वहीं, बल्लेबाजी में वह एबी डिविलियर्स को अपना आदर्श मानते हैं। फिटनेस के मामले में जुरेल विराट कोहली के कायल हैं। अब आईपीएल में उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई है। आने वाले मुकाबलों में उन्हें ज्यादा मौके मिल सकते हैं और ऐसे में वह बड़ी पारी खेलकर टीम इंडिया के लिए भी दावेदारी पेश कर सकते हैं। 22 साल के ध्रुव के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए अभी समय भी है।