पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का कहना है कि खेलों के विकास के लिए परिणाम की चिंता छोड़ कर खेल भावना और फिटनेस पर अधिक ध्यान देना चाहिए। बकौल द्रविड़, ‘हम हमेशा परिणामों के बारे में ही सोचते रहते हैं जबकि अच्छे परिणाम और अच्छा प्रदर्शन हमारे लगातार प्रयासों का नतीजा होता है। इसलिए अगर हमें अच्छे परिणाम चाहिए तो सबसे पहले परिणामों के बारे में सोचना छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खेलों के नतीजे कभी भी किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर करता है लेकिन आपका प्रदर्शन आपके हाथों में होता है। दुनिया की आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद भारत में कुछ ही खेलों में देश को सफलता हासिल हुई है जबकि कई गरीब देशों में कम सुविधाओं के बावजूद उनके पास दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं।’
पूर्व कप्तान ने यह भी कहा खेलों की बजाए शिक्षा को भविष्य के लिए बेहतर विकल्प मानने की सोच में बदलाव आना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘आज के समय में भी कुछ ही माता-पिता होते हैं, जो अपने बच्चों को शिक्षा की बजाए खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए जरूरी है हमारे देश में खेले भावना और फिटनेस को बढ़ावा दिया जाए क्योंकि इसी के जरिये ही खेलों का विकास संभव है।’