बदलाव की कवायद के मद्देनजर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के कंधों से कप्तानी के बोझ कम किया जा सकता है। संदीप पाटिल की अध्यक्षता में चयनकर्ता भविष्य में धोनी को किसी एक फॉर्मेट से हटाने के मूड में हैं ताकि वह विकेटकीपिंग और अपनी बल्लेबाजी पर ज्यादा ध्यान दे सकें।
विदेशी धरती पर इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया में मिली शर्मनाक हार के बावजूद पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने धोनी को टेस्ट कप्तान बनाए रखने की वकालत की है। वर्ल्ड कप जीतने के बाद धोनी खुद 2015 से पहले किसी एक फॉर्मेट को छोड़ने और विकल्प के तौर पर सौ मैच खेलने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज तलाशने की बात कर चुके हैं।
कमेंट्रटर हर्षा भोगले और संजय मांजरेकर के साथ बातचीत के दौरान द्रविड़ ने कहा, ‘धोनी के लिए अहम यह है कि वह विदेशी धरती पर भारत के रिकॉर्ड को सुधारने की रणनीति बनानी शुरू कर देनी चाहिए। अगले साल भारत का अहम दौरा दक्षिण अफ्रीका है। धोनी को अभी से ही इस संबंध में चयनकर्ताओं से बातचीत करनी चाहिए। साथ ही उन्हें चयनकर्ताओं को यह बताना चाहिए कि उन्हें किस प्रकार के खिलाड़ियों की दरकार है।
द्रविड़ ने कहा, मेरी व्यक्तिगत राय में कि मैं धोनी को एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में देखना चाहूंगा। उन्होंने बतौर बल्लेबाज और विकेटकीपर काफी योगदान दिया है। इन दोनों ही क्षेत्रों में अब उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। लिहाजा आने वाले समय में उन्हें किसी एक फॉर्मेट की कप्तानी के बोझ से मुक्त किया जा सकता है। मेरा मानना है कि उन्हें टेस्ट कप्तान बनाए रखना चाहिए। बाकी दो फॉर्मेट वन-डे और टी-20 में से किसी एक में उनकी कप्तानी के बोझ को कम किया जा सकता है।’