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गर्भवती हथिनी की मौत पर विराट हुए भावुक, कहा- कायराना हरकत बंद करो, जानवरों से प्यार करो

Wed, 03 Jun 2020 08:07 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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गर्भवती हथिनी की मौत के बाद इस तरह की सांकेतिक तस्वीरों से शोक जताया जा रहा है - फोटो : ट्विटर

दक्षिणी राज्य केरल इंसानों और जानवरों के बीच संघर्ष में मानवता के पतन की एक और कहानी का गवाह बना। शरारती तत्वों द्वारा विस्फोटक भरा अनानस खाकर गर्भवती हथिनी की मौत पर पूरा देश शोक में है। लोग सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की।

 

 

विराट ने ट्वीट किया, 'केरल में जो हुआ वो सुनकर चकित हूं। चलिए जानवरों से प्यार से पेश आते हैं। अब इस कायराना हरकत पर विराम लगाते हैं।

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सुरेश रैना - फोटो : अमर उजाला
विराट अकेले नहीं हैं, जिन्होंने बेजुबान जानवरों पर इंसानी जुल्म की इस भयावह कहानी के खिलाफ आवाज उठाई हो। कभी टीम इंडिया के मध्यक्रम की जान रहे धाकड़ खब्बू बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी खास तस्वीर के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
 


न सिर्फ भारतीय खिलाड़ी बल्कि तमाम राजनेता, मनोरंजन जगत से जुड़ी हस्तियों से लेकर आम आदमी तक ट्विटर पर #RIPHumanity हैशटेग से अपनी संवेदना प्रकट कर रहे हैं।
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मौत से जंग लड़ती हथिनी - फोटो : Social Media
बता दें कि ये घटना पिछले हफ्ते की है। खाने की तलाश में हथिनी मल्लापुरम जिले में शहर की ओर आ गई थी। यहां कुछ लोगों ने फलों के भीतर छिपाकर उसे पटाखे खिला दिए। उस बेचारी ने जैसे ही उसे खाने की कोशिश की, उसके मुंह के भीतर धमाका हो गया। वो बेतहाशा दर्द से कराहती हुई इधर-उधर भागने लगी। धमाके की वजह से मुंह के भीतर बहुत ज्यादा चोटें आई थीं। इसके बावजूद उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। किसी पर हमला नहीं किया। न ही कोई घर तोड़ा। जब दर्द सहा नहीं गया तो एक नदी में अपनी सूंड को डालकर कुछ आराम दिलाने की कोशिश की। वन विभाग के कर्मी भी उसे बचाने के लिए पहुंचे। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 27 मई की शाम को उस हथिनी ने पानी में खड़े खड़े ही अपने जान दे दी।
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वन अधिकारी मोहन कृष्णन ने फेसबुक पर यह तस्वीर साझा की - फोटो : Facebook
इस घटना से बहुत ज्यादा दुखी वन अधिकारी मोहन कृष्णन ने पूरी दास्तां को साझा किया। उन्होंने लिखा, 'उसने सभी पर विश्वास किया। जब उसने अनानास खाया तो उसे नहीं पता था कि इसमें पटाखे हैं। उसका मुंह और जीभ बहुत ही बुरी तरह से चोटिल हो गई थी। भीषण दर्द में भी उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। आखिरकार वो वेलियार नदी में आकर खड़ी हो गई। वन विभाग ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन शायद उसे अंदाजा हो गया था कि उसका वक्त आ गया है। उसने ऐसा नहीं करने दिया।  



मोहन कृष्णन ने बताया कि उसे सम्मानजनक विदाई देने के लिए हमने एक ट्रक मंगवाया। हमने उसे उसी जंगल में हमने अंतिम विदाई दी, जहां उसका बचपन बीता और वो बड़ी हुई।'
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