आईसीसी ने साल 2023 से 2027 तक के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। आने वाले पांच सालों में सभी कुल 777 मैच खेलेंगी, जबकि मौजूदा चक्र (2018-2022) में यह संख्या 694 है। आने वाले पांच सालों के लिए मैचों की संख्या में 83 मैचों की बढ़ोत्तरी हुई है। मौजूदा चक्र में ही खिलाड़ियों को काफी ज्यादा मैच खेलने पड़ रहे थे और इसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। बेन स्टोक्स ने हाल ही में ज्यादा वर्कलोड का हवाला देकर वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया था।
भारत के पूर्व कोच रवि शास्त्री और पूर्व कप्तान विराट कोहली कई सालों तक वर्कलोड की शिकायत करने के बाद हार मान चुके हैं। इसके बावजूद आईसीसी और सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड ने आगामी प्रोग्राम में मैचों की संख्या कम करने की बजाय बढ़ा दी है। इससे तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को और परेशानी आएगी।
बेन स्टोक्स ने वनडे क्रिकेट से संन्यास का एलान करते हुए कहा था "तीनों प्रारूप खेलना अब मेरे लिए संभव नहीं है। खासकर जो शेड्यूल रहता है और हमसे जिस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है, वह काफी थकाने वाला है। मेरा शरीर मुझे निराश कर रहा है, मुझे यह भी लगता है कि मैं एक और खिलाड़ी की जगह ले रहा हूं। यह किसी और क्रिकेटर के लिए क्रिकेट में आगे बढ़ने और कुछ बेहतरीन यादें बनाने का समय है, जैसे मैंने पिछले 11 वर्षों में बनाई है।"
इसके साथ ही स्टोक्स ने वर्कलोड पर अपना गुस्सा निकालते हुए कहा था "हम कार नहीं है। आप फ्यूल डालकर हमें नहीं चला सकते हैं। हम वहां जाएंगे और हमें दोबारा तैयार होने के लिए वक्त चाहिए। हम एक ही टाइम पर टेस्ट और वनडे सीरीज खेल रहे हैं। यह बहुत बेकार है।"
स्टोक्स के संन्यास के बाद काफी बवाल मचा था और कई दिग्गज खिलाड़ियों ने वनडे फॉर्मेट को बंद करने की भी मांग की थी। वहीं, कुछ ने मैचों की संख्या कम करने तो कुछ ने हर फॉर्मेट के लिए अगल टीम बनाने की बात कही थी, लेकिन आईसीसी और सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड मैचों की संख्या कम करने के पक्ष में नहीं हैं और आगामी शेड्यूल में मैचों की संख्या बढ़ा दी है।
बड़े खिलाड़ियों को हो रहा नुकसान
तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को देश के लिए हर मैच खेलने में परेशानी हो रही है। लगातार मैच होने से उन्हें आराम नहीं मिल पाता और कमजोर टीमों के खिलाफ सीरीज में उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ता है। इस वजह से विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी सिर्फ बड़ी टीमों के खिलाफ मुश्किल मैच ही खेलते हैं और यहां लगातार बड़े शतक बनाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में गेंद या बल्ले से अच्छा प्रदर्शन नहीं होने पर खिलाड़ियों के टीम में बने रहने पर भी सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि युवा खिलाड़ी कमजोर टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं।
कई बार बड़े खिलाड़ियों की लय खराब होने पर वो कमजोर टीमों के खिलाफ खेलकर अच्छा प्रदर्शन करते हैं और आत्मविश्वास के साथ लय हासिल करने के बाद अच्छी टीमों के खिलाफ भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन ज्यादा वर्कलोड की वजह से बड़े खिलाड़ियों के पास कमजोर टीमों के खिलाफ खेलने का विकल्प नहीं है।
बेन स्टोक्स के संन्यास लेने के अलावा भारत के विराट कोहली भी वर्कलोड की वजह से तीनों फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ चुके हैं। लगातार मैच खेलने की वजह से उनके प्रदर्शन में भी गिरावट आई है।