आज संयुक्त राष्ट्र की 71वीं जनरल असेंबली को भारत की विदेश मंत्री ने संबोधित किया। सुषमा स्वराज ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
कश्मीर विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज तक केवल एक बार चर्चा हुई है। यह चर्चा साल 1957 में हुई थी। पिछले सात दशक से पाकिस्तान यूएन में कश्मीर के मुद्दे को उठाता रहा है। 1957 में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा उस वक्त हुई थी जब उसी साल 26 जनवरी को कश्मीर राज्य का संविधान लागू हुआ था। इसके बाद राज्य में संवैधानिक रूप से चुनाव हुए थे। संविधान में कश्मीर को भारत का अंग बताया गया था। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा कश्मीर में किया गया सीमा का निर्धारण गलत है।
पाकिस्तान द्वारा सात दशक से कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाए जाने के बाद 192 अन्य सदस्य देशों ने इस मुद्दे को अन्य किसी देश ने नहीं उठाया। लेकिन इन सभी देशों ने उड़ी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक और सऊदी अरब से लेकर यूएई तक( जो पाकिस्तान के कभी दोस्त रहे) सभी देशों ने आतंकवाद के खात्मे की बात सभा में उठाई है। यही भारत का रुख है।