226 का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत भी खराब रही और प्रशांत चोपड़ा बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद बाबा अपाराजित ने कप्तान उन्मुक्त चंद का साथ दिया, लेकिन वे 33 रन बनाकर आउट हो गए। विहारी और विजय जोल भी जल्दी निपट गए। 97 पर चार खिलाड़ियों के लौटने के बाद उन्मुक्त चंद ने शानदार शतक लगाते हुए 14 गेंद शेष रहते ही भारत को जीत दिला दी थी। मैन ऑफ द मैच रहे उन्मुक्त के बल्ले से 130 गेंदों में 111 रन निकले थे। यह सिलसिला यही नहीं रुका 2018 में एक बार फिर से यह खिताब टीम इंडिया के नाम रहा।
टीम इंडिया के सामने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम थी। कैमरून बैनक्रॉफ्ट और ट्रेविस हेड जैसे दिग्गज उस टीम का हिस्सा थे। भारतीय टीम में उन्मुक्त चंद के अलावा बल्लेबाज हनुमा विहारी और पेसर संदीप शर्मा जैसे खिलाड़ी थे। इनके अलावा बाबर आजम, इमाम-उल-हक (पाकिस्तान), ईश सोढ़ी (न्यूजीलैंड), क्रैग ब्रैथवेट, जॉन कैम्पबेल, सुनील एम्ब्रिस (वेस्टइंडीज) लिट्टन दास, मासाद्देक हुसैन, सौम्य सरकार, तस्कीन अहमद (बांग्लादेश), क्विंटन डी कॉक (दक्षिण अफ्रीका) सरीखे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इस विश्व कप का हिस्सा थे।
विलियम बोसिस्तो की कप्तानी में बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत खराब रही और जिमी पियरसन बिना खाता खोले ही संदीप शर्मा की गेंद पर बोल्ड हो गए। तीसरे ओवर में संदीप शर्मा ने तीसरे ओवर में कैमरून बैनक्रॉफ्ट को एलबीडब्ल्यू कर ऑस्ट्रेलिया को बैकफुट पर ला दिया। इसके बाद मेरिक बुकनान और कुर्तिस पैटरसन 38 के स्कोर पर एक-एक करके आउट हो गए, फिर कप्तान बोसिस्तो ने ट्रेविस हेड के साथ पारी संभाली, लेकिन हेड जल्दी ही 37 रन बनाकर रन आउट हो गए। इसके बाद टर्नर (43) ने कप्तान का साथ दिया। मगर उनके आउट होने के बाद टीम के बाकी बल्लेबाज बोसिस्तो का साथ नहीं दे सके। बोसिस्तो 87 रन बनाकर नाबाद पवेलियन लौटे और ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को जीत के लिए 226 रन का टारगेट दिया।