भारतीय क्रिकेट टीम ने कोच्चि में 15 जनवरी को होने वाले दूसरे वन-डे के लिए जमकर अभ्यास किया। अपनी भूमिका को लेकर आलोचनाओं में घिरे कोच डंकन फ्लेचर ने खिलाड़ियों के साथ कंप्यूटर पर किए अपने विश्लेषण के आधार पर उनकी खामियों के बारे में बताया।
इंग्लैंड की टीम ने भी सीरीज में बढ़त बनाए रखने के इरादे से जमकर तैयारी की। लेकिन दोनों टीमों के लिए मौसम से तालमेल बनाना भी बड़ी समस्या है। दिल्ली और राजकोट में सर्द मौसम के बाद टीमें कोच्चि की उमस भरी गर्मी से ताल बैठा रही हैं। इसके बाद टीमों को फिर सर्द मौसम वाले इलाकों की ओर लौटना होगा।
रांची के बाद खिलाड़ियों को मोहाली की कड़कड़ाती सर्दी और फिर भारत के सबसे ऊंचे क्रिकेट मैदान, धर्मशाला में बर्फीली हवाओं का सामना करना होगा। पर्वतीय इलाका होने के कारण धर्मशाला सबसे चुनौती भरा होगा। 27 जनवरी को होने वाले सीरीज के पांचवें और आखिरी वन-डे के दौरान यहां का न्यूनतम तापमान करीब 02 डिग्री सेल्सियस होने का अनुमान है।
लंबी यात्राओं और मौसम को ध्यान में नहीं रखकर मैच स्थलों का चयन करने के कारण बीसीसीआई को इन दिनों आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
शायद दौरे का कार्यक्रम तैयार करने के दौरान बोर्ड ने टीमों के भारत का भ्रमण कराने का खास ध्यान रखा था। इंग्लैंड टीम ने अपने अभ्यास मैचों के दौरान दिल्ली की सर्दी को मुश्किल बताया था। देखना रोचक होगा कि वे धर्मशाला की सर्दी को किस नजरिये से देखेंगे।
धोनी को बदलाव के दौर से उबरना होगा: गांगुली
आलोचनाओं से घिरे भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का समर्थन मिला, जिन्होंने कहा कि टीम को बदलाव के इस दौर से उबरना पड़ेगा। टीम इंडिया के लचर प्रदर्शन की आलोचना पर प्रतिक्रिया करते हुए गांगुली ने कहा, ‘यह हर कप्तान के कार्यकाल में होता है। धोनी को इंतजार करना होगा। हर किसी के लिए कप्तान की आलोचना करना आसान होता है। मेरे समय में भी तेंदुलकर, द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में टीम को जमने में थोड़ा समय लगा था। आपको संयम बरतना पड़ता है।’