शुरुआती झटकों के बीच डटे रहे एरॉन
जिस दिन भारत के बड़े हिटर जल्दी पवेलियन लौट गए, उस दिन एरॉन जॉर्ज चट्टान की तरह क्रीज पर टिके रहे। वैभव सूर्यवंशी महज पांच रन बनाकर आउट हो गए, जबकि कप्तान आयुष म्हात्रे 38 रन बनाकर चलते बने। ऐसे नाजुक हालात में एरॉन ने संयम, टाइमिंग और समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तानी गेंदबाज़ों के सामने हार नहीं मानी।
साझेदारियों से भारत को संभाला
एरॉन ने पहले कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ 49 रनों की अहम साझेदारी की। इसके बाद पांचवें विकेट के लिए अभिग्यान कुंडू के साथ 60 रनों की महत्वपूर्ण पार्टनरशिप निभाई। उस समय भारत का स्कोर 113 पर चार विकेट गिर चुका था और पाकिस्तान के तेज गेंदबाज़ मोहम्मद सैयाम और अली रजा लगातार दबाव बना रहे थे। एरन की इस साझेदारी ने भारत को और नुकसान से बचाया।
ताकत नहीं, टाइमिंग बनी हथियार
वैभव सूर्यवंशी या आयुष म्हात्रे की तरह एरन ने ताकतवर शॉट्स पर निर्भरता नहीं दिखाई। उनकी बल्लेबाजी में ऊंची बैट लिफ्ट, शानदार फुटवर्क और गैप ढूंढने की कला साफ़ नजर आई। उन्होंने एक छक्का और 12 चौकों की मदद से रन बनाए, लेकिन हर शॉट में नियंत्रण और संतुलन दिखा।
संजू सैमसन से तुलना
सोशल मीडिया पर एरॉन जॉर्ज की बल्लेबाजी की तुलना संजू सैमसन से की जाने लगी। खासकर गेंद को बिना जोर लगाए टाइम करने की उनकी क्षमता और क्लीन स्ट्रोकप्ले ने फैंस को प्रभावित किया। उनकी पारी पूरी तरह क्लास और क्रिकेटिंग सेंस पर आधारित रही।
बाउंसर ने रोका शतक का रास्ता
एरॉन की पारी का अंत तब हुआ जब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज अब्दुल सुभान ने उन्हें बाउंसर से परखा। एरॉन ने अपनी पारी में पहली बार थोड़ा अनौपचारिक शॉट खेलने की कोशिश की और कवर क्षेत्र में कैच दे बैठे। यह विकेट उनके पहले पाकिस्तान के खिलाफ शतक से चूकने का कारण बना।
टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बड़ी पारी
हालांकि शतक नहीं आया, लेकिन यह एरॉन जॉर्ज की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी 50+ पारी थी। इससे पहले उन्होंने यूएई के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में 73 गेंदों में 69 रन बनाए थे। उस मुकाबले में भारत ने 433 रन बनाए थे, जिसमें वैभव सूर्यवंशी का रिकॉर्ड 171 रन का योगदान था।
जूनियर क्रिकेट से सीनियर सपनों तक
केरल में जन्मे और हैदराबाद के लिए खेलने वाले एरॉन जॉर्ज ने भारत के जूनियर क्रिकेट में लगातार प्रगति की है। उन्होंने उस हैदराबाद टीम की कप्तानी की, जिसने विनू मांकड़ ट्रॉफी जीती और राज्य का 38 साल का खिताबी इंतजार खत्म किया।
रन मशीन के रूप में पहचान
एरॉन ने पिछले दो सत्रों में विनू मांकड़ ट्रॉफी में क्रमशः 341 और 373 रन बनाए, जिससे वह अंडर-19 स्तर पर हैदराबाद के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ बनकर उभरे। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें इसी साल बेंगलुरु में आयोजित अंडर-19 त्रिकोणीय सीरीज के लिए इंडिया-बी का कप्तान भी बनाया गया।
पिता बने सबसे बड़ी ताकत
एरॉन की सफलता के पीछे उनके पिता ईसो वर्गीस का बड़ा योगदान है। ईसो खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन सहयोग की कमी के कारण सपना पूरा नहीं कर सके। उन्होंने लीग क्रिकेट खेला, फिर पुलिस और कॉरपोरेट सेक्टर में काम किया, ताकि बेटे के सपनों को पूरा कर सकें।
एबी डिविलियर्स हैं आदर्श
एरन जॉर्ज टेबल टेनिस और बास्केटबॉल भी खेलना पसंद करते हैं। उनके आदर्श हैं एबी डिविलियर्स। एरॉन कहते हैं, 'किसी भी गेंद पर कहीं भी मारने की क्षमता सबसे बड़ी कला है। एक गेंद के लिए दो से ज़्यादा जवाब होना आपको अलग स्तर पर ले जाता है। एबी की शांति और सज्जनता मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।'
चयनकर्ताओं की नजर में लगातार
एरॉन 2022–23 विजय मर्चेंट ट्रॉफी के बाद से चयनकर्ताओं की नजर में हैं, जब उन्होंने बिहार के खिलाफ नाबाद 303 रन बनाए थे। तब से उनकी पहचान अचानक चमकने वाले खिलाड़ी की नहीं, बल्कि निरंतर प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज की रही है।
भारत को मिला भरोसेमंद भविष्य
एशिया कप में दो अहम पारियों के साथ एरन जॉर्ज ने खुद को भारत के सबसे भरोसेमंद अंडर-19 बल्लेबाजों में शामिल कर लिया है। पाकिस्तान के खिलाफ शतक भले ही दूर रह गया, लेकिन दबाव में टिके रहने और लंबी पारी खेलने की उनकी क्षमता उन्हें अगली पीढ़ी से अलग खड़ा करती है।