राष्ट्रीय चयनकर्ता देवांग गांधी को उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब गुरुवार को उन्हें रणजी ट्रॉफी के एक मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। बीसीसीआई की भ्रष्टाचार नियंत्रक शाखा ने ईडन गार्डंस मैदान पर बंगाल रणजी टीम के ड्रेसिंग रूम से देवांग गांधी को बाहर कर दिया।
घटना, बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच मैच के दूसरे दिन तब हुई जब खराब रोशनी की वजह से मैच रोक दिया गया था, तब गांधी बंगाल के ड्रेसिंग रूम में टीम के फिजियो को तलाशते पहुंचे थे। बीसीसीआई के भ्रष्टाचार नियंत्रक अधिकारी सुमन करमाकर तक जब बंगाल के कप्तान मनोज तिवारी ने यह बात पहुंचाई तब देवांग गांधी पर कार्रवाई की गई।
नियमों के मुताबिक मैच के लिए चुने गए खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के अलावा कोई अन्य व्यक्ति ड्रेसिंग रूम में प्रवेश नहीं कर सकता। मनोज तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, 'हमने एंटी-करप्शन प्रोटोकॉल का पालन किया है। एक राष्ट्रीय चयनकर्ता ड्रेसिंग रूम में प्रवेश नहीं कर सकता। सिर्फ खिलाड़ी और अधिकारी ही ड्रेसिंग रूम में प्रवेश कर सकते हैं।'
इस बारे में देवांग गांधी ने कहा, 'मैच के दौरान बाउंड्री के बाहर बैठे रहने से मेरी कमर में दर्द हो रहा था। मेरी हालत के बारे में जानकर बंगाल टीम के कोच अरुण लाल ने मुझे टीम फिजियो से मिलने की सलाह दी। ड्रेसिंग रूम में एंट्री से पहले मैंने एंटी-करप्शन अधिकारी की अनुमति ली और फिजियो से क्रिकेट असोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) के मेडिकल रूम में मेरी जांच करने को कहा।'
बंगाल की रणजी टीम के पूर्व कप्तान देवांग गांधी ने मौजूदा कप्तान मनोज तिवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ईस्ट जोन की ओर से राष्ट्रीय चयनकर्ता गांधी ने कहा कि मुझे मनोज से कोई व्यक्तिगत दिक्कत नहीं। मगर यह युवाओं के लिए एक अच्छा उदाहरण तो कतई नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पूरे मामले से बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली को अवगत करा दिया गया है।