ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में रोमांचक संघर्ष के बाद टीम इंडिया को हार मिली थी। हालांकि इस मैच में भारत ने अंत तक संघर्ष किया और एक समय जीत की ओर जाती दिख भी रही थी। यह तब तक था जब तक मुरली विजय और कार्यवाहक कप्तान विराट कोहली क्रीज पर बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन नाथन ल्योन की एक गेंद पर मुरली एलबीडब्ल्यू हो गए और 99 रन के निजी स्कोर पर इस बल्लेबाज के आउट होने के बाद तो विकेटों का पतन इस कदर शुरू हो गया लेकिन भारत यह मैच ही गंवा बैठा।
खैर, पहले मैच में संघर्षपूर्ण हार के 3 दिन बाद बुधवार को जब ब्रिसबेन में दोनों टीमों के बीच दूसरा टेस्ट मैच शुरू हुआ तो मुरली जैसे अपने पिछली बार टेस्ट शतक लगाने के मौके को गंवाने को इस बार हासिल करने में मूड में दिखे और उन्होंने लाजवाब बल्लेबाजी करते हुए तीन अंकों में पहुंचने का अपना ख्वाब पूरा कर लिया और वह भी एक ऐसे इतिहास के साथ जिसे आज तक किसी ने भी नहीं किया है।
21 पारियों के बाद हुई अर्धशतकीय साझेदारी
ब्रिसबेन का प्रसिद्ध गाबा मैदान अपनी तेज पिच के लिए जाना जाता है ऐसे मे माना जा रहा था कि भारतीय बल्लेबाजों को इस पिच पर खेलने में दिक्कत आएगी लेकिन मुरली विजय और अन्य बल्लेबाजों ने कंगारुओं के तेज आक्रमण को बोथरा साबित करते हुए पहले ही दिन 300 से ज्यादा रन बना लिए।
मुरली और शिखर धवन ने दूसरे टेस्ट के पहले दिन 56 रनों की साझेदारी कर भारत को ठोस शुरुआत दिलाई। हालांकि टेस्ट मैच के लिहाज से इस साझेदारी को बड़ी साझेदारी तो नहीं कही जा सकती, लेकिन गाबा में पिछली 21 टेस्ट पारियों के बाद किसी विदेशी ओपनिंग जोड़ी की यह पहली अर्धशतकीय साझेदारी है।
भारत के लिए भी 56 रनों की यह अर्धशतकीय साझेदारी काफी सुकूनभरी रही क्योंकि विदेशी धरती पर 3 साल बाद किसी ओपनिंग जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 50 रन से ज्यादा की साझेदारी की है। ओपनिंग जोड़ी ने इससे पहले आखिरी बार विदेशी सरजमीं पर 2011 में हुए लॉर्ड्स टेस्ट में अर्धशतकीय साझेदारी की थी।
सौ साल के इतिहास में पहला शतक मुरली के नाम
अभी तक हमने भारत की ओपनिंग जोड़ी के बारे में बात की अब आपको बताते हैं गाबा के शतकवरी मुरली विजय की साहसिक शतकीय पारी के बारे में। कप्तान धोनी के टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने के फैसले के बाद मुरली और धवन ने टीम को ठोस शुरुआत दिलाई।
टेस्ट टीम के नियमित बल्लेबाज बन चुके मुरली ने अपने शुरुआती 39 रन के लिए 50 गेंदों का सामना किया जबकि अगले 15 रनों के लिए 50 और गेंद खेली।
गाबा में मुरली ने 213 गेंदों का सामना करते हुए 144 रनों की पारी खेली। वह इस मैदान पर 200 गेंदों का सामना करने वाले दुनिया के 10वें विदेशी ओपनर बन गए हैं।
इसके अलावा उनकी शतकीय पारी ने इस मैदान पर एक दुर्लभ रिकॉर्ड भी बना दिया है। गाबा में शतक लगाने वाले मुरली दुनिया के पहले और एकमात्र विदेशी सलामी बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले वेस्टइंडीज के ओपनर जोई क्रू ने 1968 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यहां पर 83 रनों की पारी खेली थी फिर इस मैदान पर कोई विदेशी ओपनर 80 से ज्यादा का स्कोर नहीं कर सका।
इस मैदान की स्थापना 1895 में हुई थी, हालांकि पहला टेस्ट इस मैदान पर ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच 27 नवंबर से 3 दिसंबर 1931 में खेला गया। यानी इस मैदान पर 83 साल के टेस्ट इतिहास में मुरली से पहले एक भी विदेशी ओपनर शतक नहीं लगा सका था।
54 साल बाद किसी विदेशी टीम ने बनाए इतने रन
टीम इंडिया के ओपनर मुरली विजय ने विदेशी धरती पर किसी टेस्ट सीरीज में लगातार तीसरी बार 50 या उससे ज्यादा का स्कोर किया है। ब्रिसबेन टेस्ट की पहली पारी में 144 रन बनाने से पहले से पहले उन्होंने एडिलेड की दोनों पारियों (53, 99) में भी अर्धशतक लगाए थे।
इस शतकीय पारी के साथ ही वह टीम इंडिया के ऐसे चौथे भारतीय ओपनर बन गए हैं जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर (जिम्बाब्वे से भी बाहर) लगातार 3 पारियों में 50 से ज्यादा का स्कोर किया है। इससे पहले सुनील गावस्कर (वेस्टइंडीज, 1971), माधव आप्टे (वेस्टइंडीज, 1953) और गौतम गंभीर (दक्षिण अफ्रीका, 2001) ही ऐसा कर सके हैं। हालांकि शिवसुंदर दास ने भी ऐसा किया है लेकिन उन्होंने 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ यह कारनामा किया था।
मुरली से पहले इस मैदान पर पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने दिसंबर, 2003 में पहली पारी में शतक लगाया था। साथ ही 54 साल साल बाद किसी विदेशी टीम ने गाबा के मैदान पर पहले दिन 300 से ज्यादा का स्कोर किया है। इससे पहले आखिरी बार वेस्टइंडीज ने पहले दिन 7 विकेट पर 359 रन बनाए थे।